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मोहर्रम का पहला अलम जुलूस निकला, गूंजी या हुसैन की सदाएं

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PARDARSHI VIKASH NEWS प्रयागराज। मोहर्रम का चांद नजर आते ही शहर में गम-ए-हुसैन की फिजा छा गई। चांद रात के मौके पर ऐतिहासिक लल्लन नाई के इमामबाड़े से मोहर्रम का पहला अलम जुलूस पूरी अकीदत और सम्मान के साथ निकाला गया। यह जुलूस हजरत इमाम हुसैन और कर्बला के 72 शहीदों की याद में आयोजित किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में अकीदतमंद शामिल हुए।धार्मिक कार्यक्रमों की शुरुआत मगरिब की नमाज के बाद फातेहा ख्वानी और तबर्रुक वितरण से हुई। ईशा की नमाज के बाद अलम उठाया गया और जुलूस अपने पारंपरिक मार्ग पर रवाना हुआ। ढोल-ताशे और शहनाई की मातमी धुनों के बीच पूरा माहौल हुसैनी रंग में नजर आया।जुलूस में शामिल ई-रिक्शा पर सवार बच्चे "या अली, या हुसैन" के नारे लगाते हुए दिखाई दिए। वहीं महिलाओं ने अलम मुबारक पर फूल चढ़ाकर अपनी मन्नतें मांगीं। शहर के प्रमुख मार्गों से गुजरते हुए जुलूस में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए और पूरे रास्ते "लबैक या हुसैन" और "या अली, या हुसैन" की सदाएं गूंजती रहीं।अलम जुलूस दोंदीपुर, सुनारी गली, काटजू रोड, बरनताला, शाहनूर अलीगंज, सब्जी मंडी, घंटाघर, बजाजा पट्टी, कोतवाली, सिवई मंडी और पत्थर गली होते हुए देर रात वापस इमामबाड़े पहुंचकर संपन्न हुआ।इस दौरान मोहर्रम कमेटी की ओर से विभिन्न क्षेत्रों से आए ताजियादारों का साफा बांधकर और तबर्रुक देकर सम्मान किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता सरफराज अहमद ने की। जुलूस के सफल आयोजन में मेराज अहमद, फैयाज अहमद, समीर अहमद, मोहम्मद अफजल, मोहम्मद समद, मोहम्मद इमरान, मोहम्मद फैजान और मोहम्मद सैफ सहित कई लोगों का सहयोग रहा।सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पुलिस और प्रशासन पूरी तरह अलर्ट रहा। पूरे जुलूस मार्ग की निगरानी ड्रोन कैमरों से की गई। प्रशासनिक अधिकारियों और पुलिस की मौजूदगी में जुलूस शांतिपूर्ण और सौहार्दपूर्ण माहौल में संपन्न हुआ।