
झांसी। महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी में महिला मरीज के परिजनों के साथ मारपीट और इलाज में लापरवाही का मामला सामने आया है। बड़ागांव के गांधीनगर निवासी प्रसन्न कुमार अहिरवार ने आरोप लगाया कि उनकी पत्नी अल्का (24) को गंभीर हालत में भर्ती कराने के बावजूद करीब 18 घंटे तक समुचित इलाज नहीं मिला। विरोध करने पर सिक्योरिटी गार्डों ने उन्हें और उनके पिता को लाठियों से पीट दिया।
प्रसन्न कुमार ने बताया कि उनकी पत्नी नौ माह की गर्भवती थी। प्रसव पीड़ा होने पर 6 अप्रैल को मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया था, जहां अगले दिन ऑपरेशन से डिलीवरी हुई। कुछ दिन बाद महिला का पेट फूलने लगा और हालत बिगड़ने पर परिजन निजी अस्पतालों में इलाज कराते रहे। आर्थिक स्थिति कमजोर होने पर 25 अप्रैल की रात दोबारा मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी में भर्ती कराया गया।
आरोप है कि रविवार दोपहर तक महिला का इलाज शुरू नहीं हुआ। इसी दौरान ड्रिप में फ्लूड न आने पर उन्होंने फोटो खींची, जिससे डॉक्टर नाराज हो गए और गार्डों को बुला लिया। इसके बाद वार्ड का गेट बंद कर पिता-पुत्र की पिटाई की गई। सूचना पर पुलिस भी पहुंची।
वहीं, मेडिकल कॉलेज के सीएमएस डॉ. सचिन माहुर ने आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि महिला पहले से गंभीर बीमारियों से ग्रसित थी। परिजन इलाज बीच में छोड़कर निजी अस्पताल ले गए थे, जिससे हालत और बिगड़ गई। दोबारा भर्ती होने पर तत्काल उपचार शुरू किया गया। मारपीट और मोबाइल छीने जाने की कोई शिकायत नहीं मिली है।