
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के वरिष्ठ प्रचारक, सहकार भारती के संस्थापक तथा संगठन निर्माण के अप्रतिम शिल्पी लक्ष्मणराव माधवराव इनामदार, जिन्हें पूरे देश में 'वकील साहब' के नाम से जाना जाता है, भारतीय सार्वजनिक जीवन के उन व्यक्तित्वों में शामिल हैं जिन्होंने अपना पूरा जीवन राष्ट्रसेवा, संगठन विस्तार और समाज निर्माण के लिए समर्पित कर दिया। उनकी पुण्यतिथि पर देशभर में विभिन्न सामाजिक एवं वैचारिक संगठनों द्वारा उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन किया जा रहा है।लक्ष्मणराव इनामदार का जन्म 19 सितंबर 1917 को महाराष्ट्र के सतारा जिले में हुआ था। युवावस्था से ही उनमें राष्ट्रभक्ति और सामाजिक चेतना की भावना प्रबल थी। उन्होंने कानून की पढ़ाई प्रारंभ की, लेकिन राष्ट्रहित को सर्वोपरि मानते हुए सार्वजनिक जीवन का मार्ग चुना। इसी कारण लोग उन्हें स्नेहपूर्वक "वकील साहब" कहकर पुकारने लगे और यही नाम उनकी पहचान बन गया।स्वतंत्रता आंदोलन के दौर में उन्होंने निजाम शासन के विरुद्ध चलाए गए हैदराबाद सत्याग्रह में भाग लिया। इस दौरान उन्हें जेल भी जाना पड़ा और अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। लेकिन राष्ट्रसेवा के प्रति उनका संकल्प कभी कमजोर नहीं पड़ा। जेल से लौटने के बाद उन्होंने स्वयं को पूर्णकालिक सामाजिक कार्य के लिए समर्पित कर दिया।सन् 1940 के दशक में उन्हें गुजरात में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक के रूप में कार्य करने की जिम्मेदारी मिली। उस समय गुजरात में संघ का कार्य सीमित था, लेकिन वकील साहब ने गांव-गांव, कस्बे-कस्बे और शहर-शहर जाकर संगठन का विस्तार किया। उनकी सादगी, अनुशासन, प्रभावशाली व्यक्तित्व और प्रेरणादायी भाषणों ने हजारों युवाओं को राष्ट्रसेवा से जोड़ा।महात्मा गांधी की हत्या के बाद संघ पर लगे प्रतिबंध के कठिन दौर में भी उन्होंने संगठन को मजबूत बनाए रखा। प्रतिबंध हटने के बाद कुछ ही वर्षों में उन्होंने गुजरात में सैकड़ों शाखाओं का विस्तार कराया और अनेक नए कार्यकर्ताओं को तैयार किया।लक्ष्मणराव इनामदार को सहकार भारती का संस्थापक भी माना जाता है। उनका मानना था कि सहकारिता केवल आर्थिक व्यवस्था नहीं बल्कि सामाजिक समरसता और आत्मनिर्भर भारत का सशक्त माध्यम है। उन्होंने किसानों, ग्रामीण समाज और सहकारी संस्थाओं को मजबूत बनाने के उद्देश्य से सहकारिता आंदोलन को नई दिशा दी।आज देशभर में सहकार भारती जिस व्यापक स्वरूप में कार्य कर रही है, उसके पीछे वकील साहब की दूरदृष्टि, संगठन क्षमता और समर्पण का महत्वपूर्ण योगदान माना जाता है।लक्ष्मणराव इनामदार का नाम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के राजनीतिक एवं वैचारिक जीवन से भी विशेष रूप से जुड़ा हुआ है। गुजरात में संघ कार्य के दौरान उन्होंने युवा नरेंद्र मोदी का मार्गदर्शन किया और उन्हें संगठनात्मक कार्यों की बारीकियां सिखाईं।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अनेक अवसरों पर सार्वजनिक रूप से स्वीकार कर चुके हैं कि वकील साहब उनके जीवन के सबसे बड़े प्रेरणास्रोतों में से एक थे। उन्होंने अपनी पुस्तकों 'ज्योतिपुंज' तथा 'सेतुबंध' में भी लक्ष्मणराव इनामदार के व्यक्तित्व, कार्यशैली और जीवन मूल्यों का विस्तार से उल्लेख किया है।वकील साहब का जीवन अत्यंत सादा था। वे नियमित योग, प्राणायाम, ध्यान और अध्ययन करते थे। व्यक्तिगत सुख-सुविधाओं से दूर रहकर उन्होंने अपना पूरा जीवन संगठन और समाज को समर्पित कर दिया।वे हमेशा कहते थे कि किसी भी कार्यकर्ता की सबसे बड़ी पूंजी उसका चरित्र, अनुशासन और समाज के प्रति समर्पण होता है। वे स्वयं उदाहरण प्रस्तुत कर कार्यकर्ताओं को प्रेरित करते थे।लक्ष्मणराव इनामदार केवल संगठन के प्रशासक नहीं थे बल्कि एक कुशल शिक्षक और मार्गदर्शक भी थे। वे नए कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारी देने में विश्वास रखते थे। उनका मानना था कि अनुभव कार्य करते-करते ही प्राप्त होता है।वे जटिल विषयों को भी सरल उदाहरणों के माध्यम से समझाने की अद्भुत क्षमता रखते थे। यही कारण था कि हजारों स्वयंसेवकों ने उनके मार्गदर्शन में नेतृत्व कौशल विकसित किया।उनका पूरा जीवन इस विचार पर आधारित था कि राष्ट्र सर्वोपरि है। उन्होंने कभी किसी पद या सम्मान की इच्छा नहीं की। उनके लिए समाज सेवा ही सबसे बड़ा पुरस्कार थी। वे मानते थे कि संगठित समाज ही मजबूत राष्ट्र का निर्माण करता है।उनकी कार्यशैली में सेवा, समर्पण, आत्मानुशासन और संगठन के प्रति निष्ठा स्पष्ट दिखाई देती थी। यही कारण है कि आज भी उन्हें संघ परिवार और सहकारिता आंदोलन के प्रमुख प्रेरणास्रोतों में गिना जाता है।वर्तमान समय में जब आत्मनिर्भर भारत, सहकारिता और सामाजिक सहभागिता पर विशेष बल दिया जा रहा है, तब लक्ष्मणराव इनामदार के विचार और अधिक प्रासंगिक दिखाई देते हैं। उन्होंने वर्षों पहले जिस सहकारिता आधारित विकास मॉडल की कल्पना की थी, वह आज भी ग्रामीण अर्थव्यवस्था और सामाजिक विकास के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।उनका विश्वास था कि यदि समाज संगठित होगा, तो राष्ट्र स्वतः सशक्त बनेगा। यही संदेश आज भी लाखों स्वयंसेवकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं को प्रेरित करता है।उनकी पुण्यतिथि के अवसर पर विभिन्न सामाजिक, सांस्कृतिक और सहकारी संगठनों द्वारा श्रद्धांजलि सभाओं, विचार गोष्ठियों और सेवा कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। कार्यकर्ता उनके चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प ले रहे हैं।लक्ष्मणराव इनामदार का जीवन त्याग, तपस्या, अनुशासन और राष्ट्रसेवा का अनुपम उदाहरण है। उन्होंने न केवल एक सशक्त संगठन खड़ा किया, बल्कि ऐसे असंख्य कार्यकर्ताओं का निर्माण किया जिन्होंने आगे चलकर समाज और राष्ट्र जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनकी सादगी, दूरदर्शिता और संगठन क्षमता उन्हें भारतीय सार्वजनिक जीवन के महान प्रेरणास्रोतों में स्थान दिलाती है।आज उनकी पुण्यतिथि पर पूरा राष्ट्र उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन करते हुए उनके आदर्शों को स्मरण कर रहा है। उनका जीवन संदेश यही है कि राष्ट्रहित, समाज सेवा और संगठन शक्ति ही सच्चे नेतृत्व की पहचान है।
"वकील साहब का व्यक्तित्व सादगी, संगठन कौशल और राष्ट्रभक्ति का अद्भुत संगम था। उन्होंने सहकारिता को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने का जो सपना देखा, उसे साकार करना हम सभी की जिम्मेदारी है। उनकी पुण्यतिथि पर हम संकल्प लेते हैं कि उनके बताए सेवा, समर्पण और आत्मनिर्भरता के मार्ग पर निरंतर आगे बढ़ते रहेंगे।"-प्रदेश महामंत्री अरविंद दुबे
"लक्ष्मणराव इनामदार जी केवल एक संगठनकर्ता नहीं, बल्कि करोड़ों कार्यकर्ताओं के प्रेरणास्रोत थे। उनका जीवन हमें सिखाता है कि निस्वार्थ भाव से समाज और राष्ट्र की सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है। आज उनकी पुण्यतिथि पर हम सभी कार्यकर्ता उनके आदर्शों का अनुसरण करते हुए सहकारिता के माध्यम से समाज को सशक्त बनाने का संकल्प लेते हैं।"-प्रदेश मंत्री कैलाश निषाद
"वकील साहब का जीवन तप, त्याग और अनुशासन का जीवंत उदाहरण था। उन्होंने संगठन को परिवार मानकर कार्यकर्ताओं का निर्माण किया और सहकारिता को जनआंदोलन का स्वरूप दिया। उनकी पुण्यतिथि पर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए हम उनके विचारों और मूल्यों को जन-जन तक पहुंचाने तथा राष्ट्रहित में निरंतर कार्य करने का संकल्प लेते हैं।"प्रदेश मंत्री सतीश कठेरिया