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‘खेत तालाब योजना’ बनी अन्नदाताओं के लिए वरदान

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-जिले में खोदे गए 4,600 से अधिक तालाब, मवेशियों और फसलों को मिला नया जीवनदान

पारदर्शी विकास न्यूज़ बांदा। सूखे की मार झेलने वाले बुंदेलखंड के बांदा जिले में सरकार की खेत तालाब योजना जल संरक्षण और कृषि विकास के लिए एक बड़ी उपलब्धि साबित हो रही है। जिले में अब तक 4,600 से अधिक खेतों में तालाबों का निर्माण कराकर सरकार ने अन्नदाताओं को सिंचाई का एक मजबूत और स्थाई जरिया दिया है। इस योजना की सफलता से जहां एक ओर किसानों के चेहरे खिल उठे हैं, वहीं दूसरी ओर जिले के भूगर्भ जल स्तर में भी सुधार देखने को मिल रहा है। योजना का लाभ उठाने वाले सदर तहसील क्षेत्र के गोयरा मुगली गांव के किसान रज्जाक ने बताया कि उनके तालाब में अब साल के 12 महीने पानी उपलब्ध रहता है। रज्जाक के अनुसार, बरसात के मौसम में निचले इलाकों में बने ये तालाब प्राकृतिक रूप से पूरी तरह भर जाते हैं। इसके अलावा तालाब को रीचार्ज रखने के लिए ट्यूबवेल की भी व्यवस्था है। इस पानी से खेतों की समय पर सिंचाई हो पा रही है। जिससे फसल की पैदावार में भारी बढ़ोतरी हुई है। किसान अब इस संकटमोचक योजना के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और प्रदेश सरकार का जमकर आभार जता रहे हैं। उप कृषि निदेशक अभय कुमार सिंह यादव ने बताया कि खेत तालाब योजना के तहत बांदा जिले में अब तक लगभग 4,600 से अधिक तालाब खोदे जा चुके हैं और यह प्रक्रिया लगातार जारी है। योजना की पारदर्शिता की जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि किसानों को तालाब निर्माण के लिए दो किस्तों में सीधे पैसा दिया जाता है। पहली किस्त तालाब की खुदाई शुरू होने से पूर्व और दूसरी किस्त खुदाई के कार्य के दौरान दी जाती है।