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कानपुर नगर निगम में बड़ा खेल!

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SIT के हाथ लगे अहम दस्तावेज, 100 करोड़ के टेंडर पर जांच तेज

 



पारदर्शी विकास न्यूज़ कानपुर। कानपुर नगर निगम में कथित टेंडर और भुगतान घोटाले की जांच तेज हो गई है। बुधवार को एडीसीपी डॉ. अर्चना सिंह के नेतृत्व में एसआईटी नगर निगम पहुंची और मुख्य अभियंता एसएफए जैदी के कार्यालय में कई घंटों तक जांच की। टीम ने नामजद फर्मों सहित अन्य ठेकेदार फर्मों से जुड़े विकास कार्यों, टेंडर प्रक्रिया, भुगतान और फर्म पंजीकरण से संबंधित दस्तावेजों की पड़ताल की।एसआईटी ने कैला देवी फर्म समेत कई फर्मों के भुगतान संबंधी रिकॉर्ड की जांच की, जिसमें कुछ दस्तावेजों में कमियां सामने आने की बात कही गई। टीम ने जरूरी दस्तावेजों के फोटो और प्रिंट आउट भी लिए। नगर निगम के अधिकारियों और कर्मचारियों से रिकॉर्ड और टेंडर प्रक्रिया को लेकर पूछताछ की गई।जांच सुबह करीब 11:30 बजे शुरू हुई और शाम 5 बजे तक जारी रही। एसआईटी ने मुख्य अभियंता एसएफए जैदी के अलावा अधिशाषी अभियंता दिवाकर भास्कर और आरके सिंह से भी पूछताछ की। इंजीनियरिंग विभाग के कर्मचारियों से भी आवश्यक दस्तावेज मांगे गए। जिन अधिकारियों की शिकायत पर ठेकेदारों के खिलाफ मुकदमे दर्ज हुए हैं, उनके वीडियो बयान भी दर्ज किए गए।इससे पहले नगर निगम से जुड़े मामलों में सात फर्मों के संचालकों के खिलाफ छह एफआईआर दर्ज की गई थीं। पुलिस के अनुसार दो ठेकेदारों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि कथित सिंडिकेट का सरगना बताए जा रहे गोविंद शर्मा की तलाश जारी है। पुलिस विभिन्न ठिकानों पर दबिश दे रही है।पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल के अनुसार जांच में टेंडर प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं, ठेके बांटने, फर्मों के पंजीकरण और भुगतान से जुड़े मामलों की जांच की जा रही है। आरोप है कि कुछ ठेकेदारों का एक सिंडिकेट टेंडर प्रक्रिया को प्रभावित करता था। मामले में धोखाधड़ी, धमकी और रंगदारी सहित अन्य धाराओं में मुकदमे दर्ज किए गए हैं।नगर आयुक्त अर्पित उपाध्याय की ओर से पहले ही करीब 100 करोड़ रुपये के टेंडर निरस्त किए जा चुके हैं। साथ ही बड़ी फर्मों की जांच, ठेकेदारों के भुगतान की समीक्षा और नई फर्मों के पंजीकरण की प्रक्रिया पर कार्रवाई की गई है। एसआईटी अब जब्त दस्तावेजों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर पूरे मामले की विस्तृत जांच कर आगे की कार्रवाई करेगी।

 



नगर  आयुक्त ने 100 करोड़ के टेंडर निरस्त किए
सीएम की फटकार के बाद नगर आयुक्त ने 100 करोड़ के टेंडर निरस्त कर दिए। बड़े टेंडर लेने वाली 27 फर्मों की जांच शुरू की। ठेकेदारों के भुगतान पर रोक लगा दी। नई फर्मों की पंजीकरण प्रक्रिया पर भी पाबंदी लगाई। इसके बाद रविवार को नगर आयुक्त और नगर निगम अधिकारियों ने हॉट मिक्स प्लांट से जुड़े बड़े ठेकेदारों के ठिकानों पर छापेमारी की। टीम ने भौंती, किदवईनगर समेत शहर के अलग-अलग स्थानों पर ठेकेदारों के प्लांट पर छापेमारी की गई। किदवईनगर में ठेकेदार फर्म अजय इंटरप्राइजेज के प्लांट के गेट पर ताला मिला। इसके बाद ठेकेदार अजय कुमार वाजपेयी ने नगर निगम के मुख्य अभियंता को एक पत्र दिया। इसमें लिखा- मेरा प्लांट नए स्थान पर शिफ्ट हो रहा है। शिफ्ट होने तक प्लांट का पंजीकरण निरस्त माना जाए।


सपा-कांग्रेस ने उठाए भ्रष्टाचार पर सवाल
कानपुर नगर निगम की कार्यप्रणाली, टैक्स व्यवस्था और टेंडर प्रक्रिया को लेकर मुख्यमंत्री की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में दिए गए सख्त निर्देशों के बाद शहर की राजनीति तेज हो गई है। मुख्यमंत्री ने टेंडर प्रक्रिया में कथित कमियों, कार्यों के आवंटन और लापरवाही की जांच कर रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। इसके बाद नगर निगम से जुड़े मामलों की जांच और कार्रवाई तेज हो गई है।समाजवादी पार्टी विधायक अमिताभ बाजपेयी ने मुख्यमंत्री के निर्देशों का स्वागत करते हुए कहा कि यह कार्रवाई काफी देर से हुई है। उन्होंने नगर निगम में अधिकारियों की कार्यप्रणाली और टेंडर प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए सभी बड़े टेंडरों की स्वतंत्र जांच की मांग की। उनका आरोप है कि कुछ ठेकेदारों का एक समूह बड़े कामों पर प्रभाव रखता है और इसकी निष्पक्ष जांच से कई तथ्य सामने आ सकते हैं।वहीं कांग्रेस नेता एवं पूर्व विधायक सुहैल अख्तर अंसारी ने भी नगर निगम में भ्रष्टाचार को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि केवल अधिकारियों को फटकार लगाने से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच जरूरी है।मुख्यमंत्री के निर्देशों के बाद नगर निगम से जुड़े मामलों में पुलिस कार्रवाई भी तेज हुई है। ठेकेदारों के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने के साथ मामले की जांच के लिए एसआईटी का गठन किया गया है। अब जांच में सामने आने वाले तथ्यों और आगे की कार्रवाई पर सभी की नजर बनी हुई है।