
पारदर्शी विकास ब्यूरो कुशीनगर। नगर पालिका क्षेत्र के अभिनायकपुर में रविवार को आयोजित कृषक चौपाल एवं कार्यशाला में किसानों को गन्ना और धान की उन्नत खेती के लिए जैव उर्वरकों के महत्व की जानकारी दी गई। गन्ना विकास सलाहकार ओम प्रकाश गुप्ता ने बताया कि कालीसेना जैव उर्वरक के नियमित प्रयोग से न केवल गन्ने की उपज बढ़ती है, बल्कि फफूंद जनित रोगों पर भी प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है।उन्होंने कहा कि जैव उर्वरक मिट्टी में लाभकारी सूक्ष्म जीवाणुओं की संख्या बढ़ाकर उसकी उर्वरता में सुधार करते हैं। गन्ने में लगने वाले रेडरॉट और जलभराव वाले क्षेत्रों में होने वाले उकठा रोग के नियंत्रण में कालीसेना जैव उर्वरक उपयोगी सिद्ध होता है। इसके लिए 4 किलोग्राम प्रति एकड़ की मात्रा नमी वाली मिट्टी में प्रयोग करने की सलाह दी गई।कार्यशाला में किसानों को इस समय गन्ने की फसल में मिट्टी चढ़ाने की भी सलाह दी गई। बताया गया कि इससे फसल गिरने की आशंका कम होती है, खरपतवार नियंत्रण में रहते हैं, जल निकास बेहतर होता है और अनावश्यक किल्लों की वृद्धि रुकने से गन्ने की मोटाई एवं उत्पादन में वृद्धि होती है।धान की फसल के संबंध में उन्होंने बताया कि कालीसेना जैव उर्वरक 8 से 10 किलोग्राम प्रति एकड़ की मात्रा में प्रयोग करने से जड़ों का विकास बेहतर होता है, पौधे अधिक हरे-भरे रहते हैं तथा किल्लों की संख्या बढ़ती है। उन्होंने किसानों से गन्ना और धान दोनों फसलों में जैव उर्वरकों के उपयोग को अपनाने का आह्वान किया।ओम प्रकाश गुप्ता ने बताया कि जैव उर्वरकों के प्रयोग से उत्पादन लागत कम होती है, औसत उपज बढ़ती है और कीट एवं रोगों का प्रकोप भी घटता है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार भी जैविक एवं प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए किसानों को जागरूक कर रही है।किसानों के सवालों का जवाब देते हुए उन्होंने कैड ओके जैव उर्वरक की जानकारी भी दी। बताया कि इसमें 12 प्रतिशत पोटाश तथा आवश्यक सूक्ष्म पोषक तत्व मौजूद हैं। इसे गन्ने में 25 किलोग्राम तथा धान में 10 से 15 किलोग्राम प्रति एकड़ की मात्रा में नमी की स्थिति में प्रयोग करना लाभकारी है। उन्होंने यह भी बताया कि जैव उर्वरकों की उपयोगिता पर उन्होंने गन्ना शर्करा अनुसंधान संस्थान, वीएसआई पुणे (महाराष्ट्र) से विशेष प्रशिक्षण प्राप्त किया है।कार्यशाला में प्रमुख कृषक रामचंद्र यादव, कृष्ण शर्मा, विश्वंभर सिंह, गया, उमेश सिंह, राजू यादव, विश्वास सिंह, रामप्रवेश यादव, सुनील कुशवाहा सहित बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में किसानों ने प्रदर्शन प्लॉट का अवलोकन कर जैव उर्वरकों के प्रयोग की तकनीक को भी समझा।