
कलियुग में भगवान का नाम ही सर्वोपरि : मयूर कृष्ण शरण महाराज
उज्जैन।महाकाल की पावन नगरी अवंतिका पुरी उज्जैन के राजमहल होटल एंड रिसॉर्ट्स में श्रीकृष्ण कीर्ति फाउंडेशन एवं श्रीराधा माधव सेवा समिति के संयुक्त तत्वावधान में सप्त दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ बड़े ही हर्षोल्लास एवं श्रद्धाभाव के साथ प्रारम्भ हो गया है।महोत्सव का शुभारंभ भव्य कलश यात्रा के साथ हुआ। कलश यात्रा में बड़ी संख्या में भक्तों-श्रद्धालुओं ने उत्साह एवं भक्तिभाव के साथ सहभागिता की। भजन, संकीर्तन और भगवान श्रीकृष्ण के जयघोष से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा। तत्पश्चात व्यासपीठ पर आसीन श्रीधाम वृंदावन से पधारे श्रीमद्भागवत के सुमधुर प्रवक्ता मयूर कृष्ण शरण महाराज ने अपनी सरस वाणी के द्वारा देश-विदेश से आए समस्त भक्तों-श्रृद्धालुओं को श्रीमद्भागवत महापुराण के महात्म्य की कथा श्रवण कराते हुए कहा कि भागवत केवल धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि मनुष्य के जीवन को भक्ति, संस्कार, प्रेम, सदाचार और सकारात्मकता की दिशा देने वाला जीवन-दर्शन है। कलियुग में भगवान का नाम, कथा और सत्संग जीवन को नई दिशा देने की शक्ति रखते हैं।उन्होंने कहा कि भागवत कथा का वास्तविक उद्देश्य केवल कथा सुनना नहीं, बल्कि उसके संदेश को अपने जीवन में उतारना है। भगवान श्रीकृष्ण के प्रति प्रेम, परिवार में संस्कार, माता-पिता का सम्मान और समाज के प्रति सेवा भावना ही भागवत के मूल संदेश हैं।इस अवसर पर श्रीराधा माधव सेवा समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष लाजपत राय बंसल, सुभाष सिंगला, जितेंद्र अग्रवाल, उमेश बंसल, आनंद किशोर अग्रवाल, मुकेश गर्ग, जुगल शर्मा, हरिनारायण अग्रवाल, अश्वनी मित्तल, पवन अग्रवाल, महिला मंडल अध्यक्ष श्रीमती कांता बंसल (चंडीगढ़), ब्रज बाला बंसल, आशा अग्रवाल, उर्मिल बंसल, निधि गर्ग, नीलांजली, रश्मि आदि के अलावा विभिन्न क्षेत्रों के तमाम गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।