
पारदर्शी विकास न्यूज़ लखनऊ। गोमतीनगर स्थित एक निजी अस्पताल में इलाज के दौरान 9 माह की बच्ची की मौत के बाद परिजनों ने जमकर हंगामा किया। परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर इलाज में लापरवाही, अप्रशिक्षित स्टाफ से उपचार कराने और बकाया बिल के नाम पर शव रोकने का आरोप लगाया। सूचना पर पहुंची पुलिस ने स्थिति को शांत कराया, जिसके बाद अस्पताल प्रशासन ने बच्ची का शव परिजनों को सौंप दिया।जानकारी के अनुसार, बाराबंकी के मसौली थाना क्षेत्र निवासी लाल बाबू की 9 माह की बेटी आस्था की तबीयत मंगलवार रात अचानक बिगड़ गई। तेज बुखार आने पर परिजन उसे गुरुवार सुबह करीब पांच बजे गोमतीनगर स्थित निजी अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने उसे आईसीयू में भर्ती कर उपचार शुरू किया।मृत बच्ची के चाचा प्रवीण गुप्ता ने आरोप लगाया कि आईसीयू में बच्ची का इलाज प्रशिक्षित डॉक्टरों की बजाय अप्रशिक्षित स्टाफ कर रहा था। उनका कहना है कि इलाज के दौरान केवल एक बार डॉक्टर बच्ची को देखने आए, जबकि हालत लगातार बिगड़ती रही। परिजनों का आरोप है कि समय पर उचित उपचार न मिलने के कारण सुबह करीब 11 बजे बच्ची की मौत हो गई।बच्ची की मौत के बाद परिजनों ने अस्पताल प्रशासन पर करीब 15 हजार रुपये का बिल थमाने और भुगतान से पहले शव न सौंपने का आरोप लगाया। इसे लेकर अस्पताल परिसर में काफी देर तक हंगामा होता रहा। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों पक्षों से बातचीत कर मामला शांत कराया।पुलिस की मौजूदगी में अस्पताल प्रबंधन ने बिना बिल का भुगतान कराए बच्ची का शव परिजनों को सौंप दिया, जिसके बाद परिजन अंतिम संस्कार के लिए शव लेकर अपने गांव रवाना हो गए।इस मामले में मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय के निजी अस्पतालों के नोडल अधिकारी एवं एसीएमओ डॉ. ए.पी. सिंह ने बताया कि अभी तक विभाग को इस संबंध में कोई औपचारिक शिकायत प्राप्त नहीं हुई है। यदि परिजनों की ओर से शिकायत मिलती है तो पूरे मामले की जांच कर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।घटना के बाद निजी अस्पतालों में उपचार की गुणवत्ता और मरीजों के अधिकारों को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। अब सभी की निगाहें इस बात पर हैं कि शिकायत मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग इस मामले में क्या कार्रवाई करता है।