
स्थानीय लोगों ने उठाए सवाल, निर्माण एजेंसी बोली– सिर्फ वर्षा जल निकासी के लिए है व्यवस्था
पारदर्शी विकास ब्यूरो हाटा, कुशीनगर। नगर पालिका हाटा में राष्ट्रीय राजमार्ग-28 पर बन रहे ओवरब्रिज की सर्विस लेन के किनारे हो रहे नाली निर्माण को लेकर विवाद गहरा गया है। नाली में 45 फीट गहरे बनाए जा रहे रिचार्ज बोर को लेकर स्थानीय लोगों ने भूजल प्रदूषण की आशंका जताई है। उनका आरोप है कि यदि नाली का पानी सीधे इन बोरों के माध्यम से जमीन में पहुंचाया गया तो हजारों लोगों के पेयजल स्रोत प्रभावित हो सकते हैं।स्थानीय लोगों के अनुसार अब तक करीब 66 रिचार्ज बोर बनाए जा चुके हैं। नगर के अधिकांश परिवार हैंडपंप और बोरिंग के पानी पर निर्भर हैं। ऐसे में लोगों का कहना है कि बिना शुद्धिकरण के पानी जमीन में जाने से भविष्य में पेयजल संकट और जलजनित बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है।स्थानीय निवासी संतोष मिश्रा ने बताया कि पुरानी नाली तोड़कर नई नाली बनाई जा रही है, लेकिन जल निकासी की सुरक्षित व्यवस्था स्पष्ट नहीं है। वहीं अधिवक्ता अजीत मणि त्रिपाठी समेत कई लोगों ने निर्माण प्रणाली पर सवाल उठाते हुए प्रशासन से तकनीकी जांच की मांग की है। उनका कहना है कि इस संबंध में जिलाधिकारी सहित संबंधित अधिकारियों को शिकायत भी दी गई है।इस बीच विशेषज्ञों ने भी तकनीकी जांच की आवश्यकता बताई है। किसान महाविद्यालय के भूगोल प्रवक्ता शक्ति ने कहा कि यदि यह व्यवस्था केवल वर्षा जल रिचार्ज के लिए है तो इससे भूजल संरक्षण में मदद मिल सकती है, लेकिन वास्तविक स्थिति का आकलन तकनीकी जांच के बाद ही संभव है।चिकित्सा प्रभारी डॉ. प्रियंका सिंह ने कहा कि दूषित पेयजल कई गंभीर बीमारियों का कारण बन सकता है, इसलिए लोगों को केवल स्वच्छ और सुरक्षित पानी का ही उपयोग करना चाहिए।वहीं, राष्ट्रीय राजमार्ग निर्माण एजेंसी से जुड़े अधिकारी चिन्मय ने सभी आशंकाओं को खारिज करते हुए कहा कि यह नाली केवल वर्षा जल निकासी के लिए बनाई जा रही है। रिचार्ज बोर का उद्देश्य भूजल स्तर बनाए रखना है और इसमें किसी भी प्रकार का घरेलू या सीवर का गंदा पानी नहीं छोड़ा जाएगा।फिलहाल हाटा में यह मामला लोगों की चिंताओं और निर्माण एजेंसी के दावों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। अब सभी की निगाहें प्रशासन की संभावित जांच और उसके निष्कर्ष पर टिकी हैं।