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गीत-संगीत के बीच मनी पेरियार ललई सिंह की जयंती

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तर्क और विज्ञान से अंधविश्वास को चुनौती
सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ आवाज बनीं ऐतिहासिक पुस्तकें



पारदर्शी विकास न्यूज़  शाहगढ़।गड़थोलिया में पेरियार ललई सिंह यादव की जयंती धूमधाम से मनाई गई। गीतकार और बिरहा गायक सुरेन्द्र यादव ने अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से पेरियार ललई सिंह यादव के विचारों और मानववाद के सिद्धांत को धरातल पर उतारने के संदेश दिए।आयोजन समिति के अध्यक्ष राम आसरे ने ललई सिंह यादव के जीवन दर्शन की जानकारी दी और कहा कि सिपाही की तबाही और सच्ची रामायण उनकी दो ऐसी पुस्तकें थीं, जिन्होंने सामाजिक क्रांति फैलाने का  काम किया।उन्होंने जाति-व्यवस्था, छुआछूत,अंध विश्वास धार्मिक पाखंड और सामाजिक असमानता के विरुद्ध जीवन भर चेतना की मशाल जलाई आशीष मौर्य ने बताया कि ललई सिंह यादव ने शिक्षा और वैज्ञानिक चेतना को हथियार बनाकर सामाजिक असमानता और पाखंड के विरुद्ध लड़ाई लडी।कार्यक्रम का संचालन बौद्धाचार्य हरिनाथ ने किया। कन्हैयालाल,दद्दन यादव, रमेश मौर्य,राजू बौद्ध, दयाराम,राम कुमार आदि मौजूद रहे।

जीवनवृत्त एवं प्रमुख कार्य: एक नजर

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  • जन्म 1सितम्बर 1911,कठारा,झींझक-कानपुर देहात
  • पिता -गज्जू सिंह सिंह ,माता
  • -मूला देवी
  • शिक्षिका -,मिडिल तक सीमित, स्वाध्याय असाधारण रूप में व्यापक
  • पहली नौकरी -1929,वन‌विभाग में
  •  फारेस्ट गार्ड
  • 1933-,मध्य प्रदेश में कांस्टेबल पद पर भर्ती हुए
  • 1946-पुलिस एंड आर्मी संघ की स्थापना
  • प्रमुख पुस्तकें -सिपाही की तबाही -,1946
  • द रामायण -,ए ट्रू रीडिंग का हिंदी अनुवाद,-सच्ची रामायण, सबसे चर्चित पुस्तक -1968
  • अन्य रचनाएं -सिपाही की तबाही, शोषितों पर धार्मिक डकैती, सामाजिक विषमता कैसे समाप्त हो,नाटक -अंगुलिमाल,शम्बूक वध, एकलव्य, नागरिक यज्ञ,संत माया बलिदान
  • मृत्यु -7फरवरी,1993




पेरियार ललई सिंह की प्रमुख शिक्षाएं -
1-जाति नहीं इंसान महत्वपूर्ण
2-अंध विश्वास के बजाय तर्क और वैज्ञानिक सोच अपनाएं
3-शिक्षा को सामाजिक परिवर्तन का माध्यम बनाएं
4-तर्क, समानता और स्वाभिमान
5-बौद्ध धर्म अपनाएं, मानववाद सबके लिए जरूरी