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ग्लूकोमा पर जीएसवीएम की बड़ी रिसर्च

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पारदर्शी विकास न्यूज़ कानपुर। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के नेत्र रोग विभाग ने ग्लूकोमा (काला मोतियाबिंद) को लेकर महत्वपूर्ण शोध किया है। रिसर्च में उन दो जीन की पहचान की गई है, जो यह बीमारी माता-पिता से बच्चों में पहुंचाने के लिए जिम्मेदार माने जा रहे हैं। डॉक्टरों का दावा है कि अब ब्लड टेस्ट के जरिए बच्चों में पहले ही ग्लूकोमा का खतरा पता लगाया जा सकेगा और समय रहते इलाज शुरू किया जा सकेगा। यह रिसर्च कॉलेज की पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. शालिनी मोहन के निर्देशन में डॉ. सुप्रिया ने पूरी की। टीम ने एक साल तक 80 मरीजों पर अध्ययन किया। शोध को प्रकाशन के लिए ब्रिटिश जर्नल भेजा गया है।जांच में CDKN2B और AS1 नाम के दो जीन सामने आए। डॉक्टरों के मुताबिक CDKN2B जीन 37 प्रतिशत मरीजों में मिला और यह गंभीर ग्लूकोमा का प्रमुख कारण पाया गया। वहीं AS1 जीन 41 प्रतिशत मरीजों में मिला, जिसे खराब लाइफस्टाइल से जुड़ा माना जा रहा है।प्रो. संजय काला ने कहा कि यह शोध भविष्य में मरीजों के लिए बेहद उपयोगी साबित होगा। डॉक्टरों के अनुसार हैलट अस्पताल की ओपीडी में रोज 12 से 15 नए ग्लूकोमा मरीज पहुंच रहे हैं और अब युवा भी इसकी चपेट में आ रहे हैं।