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गंगा के डूबने से जुड़ी आस्था और बाढ़ का संकेत

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पारदर्शी विकास न्यूज़  कानपुर। बिठूर के ब्रह्मावर्त घाट पर स्थित ब्रह्म खूंटी धार्मिक और पौराणिक मान्यताओं के कारण श्रद्धालुओं के लिए विशेष आस्था का केंद्र है। मान्यता है कि इसी स्थान पर ब्रह्मा जी ने 99 यज्ञ किए थे और यहीं से सृष्टि की रचना का क्रम शुरू हुआ।स्थानीय मान्यता के अनुसार, यज्ञ पूर्ण होने के बाद ब्रह्मा जी जब यहां से जाने लगे तो उनकी खड़ाऊं धरती में धंस गई। खड़ाऊं के अंगूठे और अंगुली के बीच लगी कील का हिस्सा धरती के ऊपर रह गया, जिसे बाद में ब्रह्म खूंटी के नाम से जाना गया।सावन के महीने में गंगा का जल ब्रह्म खूंटी तक पहुंचना यहां के लोगों के लिए विशेष महत्व रखता है। श्रद्धालुओं का मानना है कि जब गंगा का पानी खूंटी को डुबो देता है तो यह अच्छी बारिश का संकेत माना जाता है। वहीं, स्थानीय लोगों के अनुसार यदि ब्रह्म खूंटी का मंदिर पूरी तरह गंगा के पानी में डूब जाए तो बिठूर और कानपुर में बाढ़ का खतरा बढ़ सकता है।इन दिनों गंगा का जलस्तर बढ़ने से ब्रह्म खूंटी मंदिर के आसपास पानी पहुंच गया है। मंदिर परिसर में पानी भरने के बावजूद श्रद्धालु गंगा के पानी से होकर पहुंच रहे हैं और डूबी हुई खूंटी का पूजन, जलाभिषेक व आरती कर रहे हैं।धार्मिक मान्यताओं से इतर ब्रह्म खूंटी तक पहुंचता गंगा का पानी स्थानीय लोगों के लिए नदी के बढ़ते जलस्तर का अहम संकेत भी माना जाता है।