
पादर्शी विकास न्यूज़ अमेठी। बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष बहन सुश्री मायावती और प्रदेश अध्यक्ष विश्व नाथ पाल के निर्देश पर बहुजन समाज पार्टी के प्रतिनिधि मंडल ने सैदपुर -दलशाहपुर पहुंच कर जमीनी विवाद में हत्या के शिकार हुए पीड़ित परिवार से मुलाकात की और घटना के बारे में जानकारी ली। बहुजन समाज पार्टी ने घटना पर गहरा दुःख व्यक्त किया है और हत्याकांड में शामिल सभी अभियुक्तों की गिरफ्तारी और परिवार को पूरी सुरक्षा प्रदान करने की मांग की है।बहुजन समाज पार्टी के मंडल प्रभारी बद्री प्रसाद प्रजापति, शिवराम गौतम, जिला अध्यक्ष सुरेश कमल और बामसेफ के जिला संयोजक संजीव भारती के साथ बसपा का प्रतिनिधि मंडल रविवार को दोपहर बाद सैदपुर पहुंचा। प्रतिनिधि मंडल ने मृतक राम फली पाल के पुत्र संजय कुमार पाल से घटना के बारे में जानकारी ली। संजय कुमार पाल ने बताया कि उसके भाई सुनील कुमार पाल की छवि समाज में काफी अच्छी है। गांव के सामंतवादी लोग उससे जलन रखते थे और घटना की रात लाठी डंडे और बंदूक से लैस होकर उसे ही मारने आए थे।घर के सामने लाइट जलने के कारण वे दीवार कूदने के बाद सुनील कुमार पाल के कमरे तक नहीं पहुंच पाए और उसके पिता और भाभी को बुरी तरह घायल कर दिया।हमले की आहट सुनते ही सुनील ने छत पर चढ़कर गुहार लगा दी और हमलावर फरार हो गए। घटना में कृष्ण कुमार सिंह का पूरा परिवार शामिल रहा है।जमीनी विवाद में काफी समय से रंजिश चल रही थी, परंतु जिस दिन उसका निर्माण पूरा हुआ उस दिन लड्डू खाने कृष्ण कुमार सिंह भी आया था।संजय कुमार पाल का बड़ा भाई सुनील कुमार पाल गांव में ही रहता है। एक विद्यालय में पढ़ाता है। सबसे छोटा भाई अनिल कुमार पुणे, मुम्बई में रेलवे में नौकरी करता है।संजय कुमार पाल ने बताया कि पुलिस ने पांच लोगों को नामजद और पांच अज्ञात लोगों के विरुद्ध रिपोर्ट दर्ज की है।चार लोग गिरफ्तार भी किए जा चुके हैं।प्रतिनिधि मंडल ने जिला सचिव राज पाल, विधानसभा अध्यक्ष लक्ष्मण प्रसाद, विधानसभा प्रभारी राम अभिलाष बौद्ध, सामाजिक भाईचारा कमेटी के विधानसभा संयोजक शिव बालक, राम फल फौजी सुरेन्द्र अम्बेडकर, सेक्टर अध्यक्ष राम कुमार, सेवानिवृत्त सैनिक राजाराम आर्य, शिव प्राण कुमार,अनंत भीम बौद्ध , रामफेर आदि मौजूद रहे।
बिरादरी की जमीन का बैनामा लेना दुश्मनी का प्रमुख कारण
सुनील कुमार पाल के घर के सामने एक कच्चा मकान और जमीन स्थित है।इस मकान और जमीन का मालिक लम्बे समय से गांव छोड़ चुका है और दिल्ली रहता है।वह जब गांव आता था तो कृष्ण कुमार सिंह के परिवार के लोग उसकी सेवा सुश्रुषा करते थे। कुछ समय पहले सुनील कुमार पाल ने इस मकान और जमीन का बैनामा करा लिया। लोगों का कहना है कि जमीन के बैनामे के बाद से ही कृष्ण कुमार सिंह और सुनील कुमार पाल के परिवार से अंदरुनी रंजिश बढ़ गई थी। गांव समाज में सुनील कुमार के अच्छे व्यवहार और अच्छी छवि से विरोधी उससे जलन रखने लगे। घटना की रात वे सुनील कुमार पाल को ही रास्ते से हटाने आए थे, परंतु जाको राखे सांइया मार सके न कोय -कहावत चरितार्थ हुई और सुनील की जान बच गई, पिता रामफली को मरा समझकर हमलावर मौके से भाग गए।