
28 साल बाद सारनाथ को विश्व धरोहर का दर्जा
पारदर्शी विकास न्यूज़ लखनऊ/अमेठी। बौद्धों के प्रमुख तीर्थ स्थल सारनाथ को यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल करने पर बौद्ध धम्म के अनुयायियों और आम्बेडकरवादी संगठनों के बीच खुशी की लहर दौड़ गई है। 28वर्ष के लम्बे इंतजार के बाद यह उपलब्धि हासिल होने पर लोग गर्व की अनुभूति कर रहे हैं।विश्व बौद्ध संघ के राष्ट्रीय संरक्षक आर सी बौद्ध ने कहा कि सारनाथ बौद्ध धम्म के अनुयायियों का हृदय स्थल है। सारनाथ को यूनेस्को की ओर से विश्व धरोहर सूची में शामिल किया जाना हर्ष और गौरव का विषय है। बौद्ध भिक्षु भंते धम्म ज्योति,भंते शीलवचन,भंते धम्म मित्र,भंते बुद्ध वंश, राज्य महिला आयोग की पूर्व सदस्य शकुंतला भारती, वरिष्ठ सामाजिक चिंतक इंजीनियर वी पी सिंह, भारतीय बौद्ध महासभा के अध्यक्ष श्याम बहादुर बौद्ध, सामाजिक चिंतक डॉ सुनील दत्त, अवकाश प्राप्त शाखा प्रबंधक राम मिलन,राम बहादुर, इंजीनियर एस पी राम, इंजीनियर रमेश चंद्र, अम्बेडकर सेवा समिति के अध्यक्ष संजय कुमार शास्त्री,कवि राम चन्द्र सरस , फूलचंद्र बौद्ध, सेवानिवृत्त शिक्षक हौसला प्रसाद ,एस सी/एस टी टीचर्स वेलफेयर एसोसिएशन के मंडल अध्यक्ष दयाशंकर आदि ने हर्ष व्यक्त किया है। महात्मा बुद्ध की प्रथम उपदेश स्थली सारनाथ को 28 वर्ष लंबे इंतजार के बाद शनिवार को यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल कर लिया गया। दक्षिण कोरिया के बुसान में आयोजित यूनेस्को समिति के 48वें सत्र में यह घोषणा की गई। इस तरह सारनाथ भारत के 45वें और उत्तर प्रदेश के चौथे विश्व धरोहर स्थल के रूप में जाना जाएगा। अभी तक प्रदेश में विश्व धरोहर स्थल ताज महल, आगरा का किला और फतेहपुर सीकरी (आगरा क्षेत्र) इस सूची के हिस्से थे। वैश्विक विरासत के सर्वोच्च मंच पर नई पहचान मिलने से सारनाथ को अंतर्राष्ट्रीय पर्यटन और सांस्कृतिक विरासत के मानचित्र पर नई मजबूती मिलेगी। काशी की बौद्ध विरासत को इस सम्मान से सारनाथ के बौद्ध मंदिर प्रभारियों, कारोबारियों संग स्थानीय लोगों ने प्रसन्नता जताई है। सारनाथ को तीन जुलाई वर्ष 1998 को यूनेस्को की संभावित सूची में शामिल किया गया था। इन 28 वर्षों में यूनेस्को की समिति ने कई बार सारनाथ का दौरा किया था। हर बार संभावना जताई जा रही थी, लेकिन निराशा हाथ लग रही थी। इसे देखते हुए मानकों को पूरा करने के साथ प्रो-पुअर पर्यटन विकास योजना समेत लगभग 100 करोड़ से अधिक रुपये खर्च किए गए। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआइ) की ओर से 2025-26 में मजबूती के साथ पुनः नामांकन किया गया। बीते फरवरी माह में यूनेस्को की ओर से नामित पुरातत्व विशेषज्ञ हबीब रजा के नेतृत्व में एक टीम सारनाथ आई थी। तीन दिनों तक पुरातत्व खंडहर परिसर में प्राचीन मूलगंध कुटी विहार, अशोक लाट, धर्मराजिका और धमेख स्तूप समेत परिसर में रखे पुरातात्विक अवशेषों की निरख-परख की थी। पुरातत्व संग्रहालय में देश के राष्ट्रीय सिंह शीर्ष समेत उसमें रखे 300 पुरातात्विक अवशेषों को देखने के साथ स्थानीय लोगों से बातचीत भी की थी। सारनाथ अंतरराष्ट्रीय पर्यटन स्थल के रूप में देश-दुनिया में ख्यात है। माना जा रहा है कि यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल होने से अब पर्यटकों की संख्या और बढ़ेगी।