
नैतिक रूप से मजबूत होने चाहिए कवि और रचनाकार:स्वामी सत्यानंद त्यागी
पारदर्शी विकास न्यूज़ अमेठी। अवधी साहित्य संस्थान का स्थापना दिवस स्थानीय एक होटल में भव्य तरीके से मनाया गया। स्थापना दिवस के अवसर पर होटल के सभागार में देश दुनिया के साहित्यकारों और अवधी प्रेमियों का जमावड़ा हुआ।कवि सम्मेलन,विमर्श , लोकार्पण एवं सम्मान समारोह का आयोजन अवधी साहित्य संस्थान और अमेठी की माटी के कवि दिवंगत रामयश पांडेय के परिवार ने मिलकर किया। कार्यक्रम में संस्थान के अध्यक्ष डॉ अर्जुन पांडेय के तीसरे कहानी संग्रह -अंजुरी मा आकाश और रामयश पांडेय के कविता संग्रह मन के भाव का विमोचन किया गया।कार्यक्रम सुबह साढ़े आठ बजे शुरू हुआ।मां वाणी के चित्र और स्वर्गीय रामयश पांडेय के चित्र पर माल्यार्पण के बाद कवियों ने अपनी प्रतिनिधि रचनाओं का पाठ किया। एक एक करके 37कवियों ने मंच पर कविता पाठ किया।दूसरे सत्र में दो नवीन पुस्तकों का विमोचन हुआ।डा अर्जुन पांडेय ने अपनी प्रतिनिधि कहानी-अंजुरी मा अकाश और कवि राम यश पांडेय के पौत्र वैभव पांडेय ने मन के भाव काव्य संग्रह की 48वीं कविता -संध्या का वंदन कैसे हो?पढ़कर सुनाई।इस रचना की मुक्त कंठ से प्रशंसा हुई। घर घर मचा कलह का नर्तन, संध्या का वंदन कैसे हो?इस भौतिकता के युग में अब अध्यात्मिक चिंतन कैसे हो?-----पंक्तियां आज भी समसामयिक और प्रासंगिक हैं तीसरे सत्र में कवियों और साहित्यकारों का सम्मान हुआ।डा अर्जुन पांडेय और उनके समधी अवधी के अंतर्राष्ट्रीय विद्वान राष्ट्रपति से सम्मानित डॉ राम बहादुर मिसिर ने कवियों और साहित्यकारों को सम्मानित किया।स्थापना दिवस समारोह में मद्रास विश्वविद्यालय के पूर्व प्रोफेसर गोविंद राजन मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद थे।मध्य प्रदेश से पं सुधाकर शर्मा, राजस्थान से पूर्व निदेशक केंद्रीय संस्थान आगरा हेमराज मीणा, कनाडा से अनिल शुक्ल और नीरजा शुक्ल , दयाराम मौर्य -प्रतापगढ,राम दुलारे सिंह सुजान, स्क्रिप्ट लेखक और नाटककार राजकपूर,डा अभिमन्यु पांडेय,अवधी के पर्याय रहे स्वर्गीय जगदीश पीयूष के पुत्र अनुपम पांडेय, पूर्व स्टेशन अधीक्षक कवि ह्रदय शब्बीर अहमद सूरी आदि मौजूद रहे।
नैतिक रूप से मजबूत होने चाहिए कवि और रचनाकार:स्वामी सत्यानंद त्यागी
कबीर आश्रम गौहानी , प्रयागराज से आए संत स्वामी सत्यानंद त्यागी ने अपने संक्षिप्त सम्बोधन में रचनाकारों के मंच को बड़ा संदेश दिया। उन्होंने कहा कि कवि और रचनाकार अपनी रचनाओं के माध्यम से समाज को दिशा देते हैं,लोग उनकी रचनाओं के साथ उनके व्यक्तिगत जीवन के बारे में भी जानना चाहते हैं। कवियों और साहित्यकारों में दुर्गुण नहीं होने चाहिए,यदि वे चरित्र से मजबूत नहीं है तो उनका लिखना पढ़ना सब बेकार है।