
पारदर्शी विकास न्यूज़ लखनऊ/अमेठी।10 विधानसभा मार्ग स्थित अंबेडकर महासभा प्रांगण से बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर के अस्थि कलश, बोधि वृक्ष, बुद्ध प्रतिमा व धम्म चक्र को हटाकर ऐशबाग विस्थापित करने के संबंध में एक एमएलसी के बयान पर बुद्ध-अंबेडकर समितियों व सामाजिक संगठनों ने कड़ा आक्रोश जताया है। आनंद बुद्ध विहार, औरंगाबाद खालसा में डॉ. अम्बेडकर अस्थि कलश बचाओ मोर्चा के संयोजक पूर्व कैबिनेट वित्त मंत्री कमला कांत गौतम की अध्यक्षता में हुई बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि सभी संगठनों के अध्यक्ष-सचिव राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, गृहमंत्री, राज्यपाल व मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजकर इन राष्ट्रीय-ऐतिहासिक प्रतीकों को इसी स्थल पर संरक्षित रखने व सौंदर्यीकरण कर भव्य स्मारक बनाने की मांग करेंगे। बहुजन समाज के सांसदों, विधायकों व राजनीतिक दलों के अध्यक्षों से भी पीएम-सीएम को पत्र लिखने का अनुरोध किया जाएगा। बैठक में तय हुआ कि अब प्रत्येक रविवार शाम 6 बजे अंबेडकर महासभा प्रांगण में भगवान बुद्ध की प्रतिमा व बाबा साहब के अस्थि कलश पर बुद्ध वंदना-पूजा अर्चना की जाएगी। पूर्व एसडीएम रामकुमार गौतम ने कहा कि इस प्रांगण में बाबा साहब के अस्थि कलश की स्थापना 14 अप्रैल 1991 को डॉ. सविता अंबेडकर ने राजकीय सम्मान से की थी। 21 अप्रैल 1993 को उपराष्ट्रपति के.आर. नारायणन ने बोधि वृक्ष, 6 दिसंबर 2001 को राजनाथ सिंह ने 101 फीट ऊंची बुद्ध प्रतिमा की घोषणा और 14 सितंबर 2017 को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने धम्म चक्र की स्थापना की थी। यह स्थल करोड़ों बुद्ध-अंबेडकर अनुयायियों की आस्था का केंद्र है।रामकुमार गौतम ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 49 के अनुसार ऐसे आस्था व राष्ट्रीय महत्व के प्रतीकों का संरक्षण राज्य सरकार का बाध्यकारी दायित्व है। इन्हें किसी व्यक्तिगत ट्रस्ट भवन में स्थानांतरित नहीं किया जा सकता। के.के. गौतम ने चेतावनी दी कि यदि इन धरोहरों से छेड़छाड़ हुई तो देश-विदेश के करोड़ों अनुयायी आंदोलन को बाध्य होंगे।
अम्बेडकर सेवा समिति ने सरकार को निशाने पर लिया
अम्बेडकर महासभा के कार्यालय को स्थानांतरित करने के सरकार के प्रयास की अम्बेडकर सेवा समिति ने तीखी आलोचना की है। सोमवार की शाम कार्यकर्ताओं ने इस मामले में सरकार को निशाने पर लिया और महामहिम राष्ट्रपति से संज्ञान में लेने की मांग की। अध्यक्ष संजय कुमार शास्त्री ने कहा कि अम्बेडकर महासभा का कार्यालय बौद्ध धम्म के अनुयायियों का पवित्र स्थल है,इस कार्यालय को अन्यत्र हटाने की कोशिश कलुषित मानसिकता की प्रतीक है।राम चन्द्र सरस,राम चन्द्र, फूलचंद्र बौद्ध, त्रिभुवन दत्त, राजेश अकेला, राजेश कुमार, ललित कुमार, दिलीप कुमार, कुल रोशन एडवोकेट, प्रमोद कुमार, बृजेश कुमार आदि मौजूद रहे।