
अम्बेडकर नगर में पत्रकारों ने डी एम को ज्ञापन देने की तैयारी की
राष्ट्रीय पर्व आए तो तिरंगा लहराए, अखबारों को विज्ञापन क्यों नहीं?
जगनायक प्रधान/संजीव भारती
पारदर्शी विकास न्यूज़ लखनऊ/अम्बेडकरनगर/अमेठी। राष्ट्रीय पर्वों पर भी उत्तर प्रदेश के अधिकांश जिलों में अखबारों को विज्ञापन नहीं मिल रहा है। विज्ञापन की सामग्री को राज्य सूचना कार्यालय जिला सूचना अधिकारियों के माध्यम से खबरों के रूप में प्रकाशित करा रहा है,जो छोटे अखबार इन विज्ञप्तियों को पूरा छाप रहे हैं, उन्हें राज्य सूचना विभाग की ओर से कोई भी विज्ञापन नहीं जारी किया जा रहा है। स्वतंत्रता दिवस का पर्व आ गया है, सभी छोटे बड़े अखबारों में मीडिया मार्केटिंग विभाग 15अगस्त की बिजनेस को लेकर पूरी ताकत से लगे हुए हैं। ब्यूरो प्रमुखों/विज्ञापन प्रभारियों और संवाददाताओं के ऊपर जबरदस्त दबाव है। कई पत्रकारों ने बताया कि पिछले दस सालों से सरकारी योजनाओं और कार्यक्रमों से सम्बंधित सभी विज्ञापन लखनऊ से प्रकाशित हो रहे हैं। जिले स्तर के अधिकारियों के पास विज्ञापन देने का कोई अधिकार नहीं रह गया है।राज्य सूचना कार्यालय समदर्शी नहीं है। राज्य सूचना और जनसंपर्क विभाग की ओर से सरकारी विज्ञापन कुछ बड़े अखबारों को ही दिए जा रहे हैं।पंचायती राज, ग्राम्य विकास विभाग,लोक निर्माण विभाग, सिंचाई विभाग, विद्युत विभाग की ओर से सभी विज्ञापन लखनऊ सूचना विभाग कार्यालय की ओर से ही जारी किए जा रहे हैं। वरिष्ठ पत्रकार राज बहादुर ने बताया कि अधिकारी चाहते हैं कि उनके सभी कार्यक्रमों की विज्ञप्तियां फोटो के साथ सौ फीसदी छप जांए, परंतु अखबार को सहयोग नहीं करना चाहते। स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस आते ही जहां देशभक्ति का रंग चढ़ता है, वहीं स्थानीय समाचार पत्रों के सामने अब एक अलग ही सवाल खड़ा हो गया है—राष्ट्रीय पर्व पर तिरंगा तो लहराएगा, लेकिन सरकारी विज्ञापन कब आएगा? सरकारी विभागों की ओर से समाचार पत्रों को विज्ञापन जारी किए जाने पर कथित रोक को लेकर जिले के पत्रकारों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। समस्या के समाधान की मांग को लेकर जनपद अंबेडकर नगर के सभी सम्मानित पत्रकार से आग्रह किया जाता है कि 12 अगस्त को सुबह 10:30 बजे ज्ञापन लेकर जिलाधिकारी से मुलाकात करेंगे। प्रतिनिधिमंडल अपनी समस्याएं जिलाधिकारी के सामने रखकर विज्ञापन व्यवस्था में समानता और स्थानीय समाचार पत्रों के हित में ठोस पहल की मांग करेगा। भिनगा टाइम्स दैनिक अखबार के जिला ब्यूरो एवं प्रेस क्लब अम्बेडकरनगर के उपाध्यक्ष ज्ञान प्रकाश पाठक और राष्ट्रीय पत्रकारसुरक्षा परिषद (रजि०) अम्बेडकरनगर के जिला अध्यक्ष अजय कुमार उपाध्याय, जिला कोषाध्यक्ष हरीलाल प्रजापति, जिला उपाध्यक्ष प्रमोद वर्मा, अमित कुमार उपाध्याय , सुनील कुमार गोंड महासचिव , बृजेश सिंह जिला प्रवक्ता, प्रेमसाग विश्वकर्मा जिला सचिव, ब्रह्मप्रकाश त्रिपाठी संगठन मंत्री, बाल गोविंद वर्मा जिला सचिव, शैयद शहनावाज अशरफ जिला सचिव,का कहना है कि प्रदेश के अन्य जनपदों में लोगों द्वारा बताया जा रहा है कि राष्ट्रीय पर्वों के अवसर पर सरकारी विभागों द्वारा समाचार पत्रों को विज्ञापन जारी किए जा रहे हैं, जबकि अम्बेडकरनगर में कथित रोक से स्थानीय समाचार पत्र आर्थिक दबाव में आ रहे हैं।उन्होंने कहा कि अखबार केवल खबरों से नहीं, बल्कि कागज, स्याही, मशीन, बिजली, छपाई, वितरण और कर्मचारियों के वेतन से भी चलता है। ऐसे में विज्ञापन व्यवस्था प्रभावित होने पर छोटे और मध्यम समाचार पत्रों के सामने आर्थिक संकट गहराना स्वाभाविक है। उनका कहना है कि इसका असर पत्रकारों के साथ-साथ समाचार पत्रों से जुड़े अन्य कर्मचारियों के रोजगार पर भी पड़ सकता है।
त्योहारों पर लिफाफे और गिफ्ट लेने में पीछे नहीं रहते अधिकारी
कई पत्रकारों ने बताया कि 15अगस्त,26जनवरी, होली, दीपावली आदि पर्वों पर सभी अधिकारी अपने मातहतों से मंहगे गिफ्ट और लिफाफे लेने में आगे रहते हैं।हर जिले में डी एम,एस पी,सी डी ओ एवं विभागों के विभागाध्यक्ष दो दिन पहले से ही गिफ्ट लेना और देना शुरू करते हैं,जिसकी जितनी कमाई उसका उतना मोटा लिफाफा,यह परम्परा आजादी के बाद से ही जारी है और लगातार मजबूत हो रही है। योगी सरकार में मुख्यमंत्री के पारदर्शी और स्वच्छ प्रशासन के फरमान का कोई असर नहीं है। तमाम अधिकारी सी ओ जी नम्बर पर फ़ोन भी नहीं उठाते।
आकाश आनंद का भाषण बना चर्चा का विषय
बसपा के नेशनल कोआर्डिनेटर आकाश आनंद का सोमवार का हाथरस का भाषण मीडिया जगत में खासी चर्चा में है। आकाश आनंद ने अपने भाषण में डबल इंजन सरकार पर विज्ञापनों पर भारी भरकम रकम खर्च कर अपनी खामियां छिपाने के आरोप लगाए हैं। स्वतंत्रता दिवस नजदीक है, विज्ञापन संग्रह में जुटे मीडिया के लोगों के बीच मंगलवार को इस भाषण की खासी चर्चा रही।
अखबार को भी ऑक्सीजन चाहिए साहब
पत्रकारों का कहना है कि यदि सरकारी विज्ञापनों के मामले में कोई नीति या रोक है तो उसकी जानकारी स्पष्ट रूप से सामने आनी चाहिए और सभी जनपदों में एक समान व्यवस्था लागू होनी चाहिए। प्रतिनिधिमंडल जिलाधिकारी से विज्ञापन रोक की स्थिति स्पष्ट करने, रोक हटाने अथवा समाचार पत्रों के लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था किए जाने की मांग करेगा। ज्ञान प्रकाश पाठक ने कहा कि पत्रकार लोकतंत्र के चौथे स्तंभ के रूप में अपनी जिम्मेदारी निभाते हैं। स्थानीय समाचार पत्र जनता और प्रशासन के बीच संवाद का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। इसलिए उनके अस्तित्व और संचालन से जुड़े विषयों को भी गंभीरता से लिया जाना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जिला प्रशासन स्तर पर समस्या का समाधान नहीं हुआ और शासन स्तर पर भी आवश्यक कार्रवाई नहीं की गई तो पत्रकारों को धरना-प्रदर्शन जैसे लोकतांत्रिक कदम उठाने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है। अब देखना यह है कि 12 अगस्त को डीएम के दरबार में पत्रकारों की फरियाद सुनाई देती है या फिर विज्ञापन वाली फाइल भी अगली तारीख के भरोसे चलती रहती है।