
किसके संरक्षण में चल रहा कटान?
तनिश सिंह
पारदर्शी विकास न्यूज़ उन्नाव। सरकार जहां पर्यावरण संरक्षण और हरियाली बढ़ाने के लिए ‘एक पेड़ मां के नाम’ जैसे अभियान चला रही है, वहीं उन्नाव में बड़े पैमाने पर हरे पेड़ों की कटान के आरोप सामने आए हैं। सफीपुर, सकुराबाद, बांगरमऊ, अटवाबैक और फतेपुर समेत कई इलाकों में कथित तौर पर लकड़ी माफिया सक्रिय हैं। आरोप है कि दिन-रात हरे पेड़ों की कटान कर उनकी लकड़ी दूसरे जिलों और राज्यों तक भेजी जा रही है।स्थानीय लोगों का दावा है कि कई क्षेत्रों में खुलेआम पेड़ों पर आरा चलाया जा रहा है। पेड़ काटने के बाद लकड़ी को वाहनों के जरिए दूसरे स्थानों पर भेजा जाता है। इससे एक ओर जहां पर्यावरण को नुकसान पहुंच रहा है, वहीं दूसरी ओर अवैध लकड़ी के कारोबार को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।सबसे बड़ा सवाल वन विभाग की निगरानी व्यवस्था को लेकर उठ रहा है। स्थानीय स्तर पर आरोप लगाए जा रहे हैं कि कुछ वन विभाग के कर्मचारियों और अधिकारियों की कथित मिलीभगत के चलते अवैध कटान पर प्रभावी रोक नहीं लग पा रही है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में पूरे मामले में निष्पक्ष जांच जरूरी मानी जा रही है।सरकार लगातार पौधरोपण और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने की बात कह रही है। ऐसे में यदि हरे पेड़ों की अवैध कटान के आरोप सही पाए जाते हैं तो यह सरकारी प्रयासों के लिए भी बड़ा झटका होगा। ग्रामीणों का कहना है कि पेड़ों की लगातार कटान से क्षेत्र की हरियाली प्रभावित हो रही है और आने वाले समय में इसका सीधा असर पर्यावरण पर पड़ सकता है।आरोप यह भी है कि कटान के बाद लकड़ी को उन्नाव से बाहर अलग-अलग जिलों और अन्य राज्यों में भेजा जा रहा है। इस पूरे नेटवर्क में कौन-कौन लोग शामिल हैं और लकड़ी कहां से काटी जा रही है, इसकी जांच की जरूरत है।अब निगाहें वन विभाग और प्रशासन की कार्रवाई पर हैं। सवाल यही है कि यदि अवैध कटान हो रहा है तो जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई कब होगी? साथ ही यह भी जांच का विषय है कि पेड़ों की कटान के लिए जरूरी अनुमति और दस्तावेज मौजूद हैं या नहीं।स्थानीय लोगों ने प्रशासन से अवैध कटान की शिकायतों की जांच कराने, दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने और क्षेत्र में वन विभाग की निगरानी बढ़ाने की मांग की है।

पेड़ों पर आरा, वन विभाग पर सवाल!
गऊ, सफीपुर, बांगरमऊ और फतेपुर समेत कई इलाकों में बड़े पैमाने पर हरे पेड़ों की कटान के आरोप लगाए जा रहे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि लकड़ी माफिया कथित तौर पर वन विभाग के कुछ कर्मचारियों और अधिकारियों की मिलीभगत से इस कारोबार को अंजाम दे रहे हैं। पेड़ों की कटान के बाद लकड़ी को दूसरे जिलों और राज्यों में सप्लाई किए जाने की बात भी सामने आ रही है।आरोप है कि अवैध कटान के इस कारोबार से जुड़े लोगों ने कम समय में बड़ी संपत्ति अर्जित की है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की जरूरत है। अब सवाल यह है कि यदि बड़े पैमाने पर अवैध कटान हो रहा है तो जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई कब होगी और ‘एक पेड़ मां के नाम’ जैसे पर्यावरण संरक्षण अभियानों के बीच हरे पेड़ों की कटान पर सरकार का शिकंजा कब कसेगा?