news-details

उन्नाव एआरटीओ कार्यालय पर गंभीर आरोप

You can share this post!


फर्जी मेडिकल प्रमाणपत्रों से बने व्यावसायिक लाइसेंस?

तनिश सिंह
पारदर्शी विकास न्यूज़ उन्नाव।
एआरटीओ कार्यालय एक बार फिर गंभीर आरोपों के कारण चर्चा में है। विभाग से निष्कासित किए गए डाटा एंट्री ऑपरेटर शिव सिंह ने परिवहन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए दावा किया है कि जनवरी 2026 से जून 2026 के बीच जारी किए गए बड़ी संख्या में व्यावसायिक ड्राइविंग लाइसेंसों में कथित रूप से फर्जी मेडिकल प्रमाणपत्र लगाए गए हैं। उन्होंने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।शिव सिंह का आरोप है कि कई आवेदकों को नियमों के अनुरूप प्रशिक्षण और स्वास्थ्य परीक्षण के बिना ही कॉमर्शियल ड्राइविंग लाइसेंस जारी कर दिए गए। उनका कहना है कि यदि छह माह के रिकॉर्ड, मेडिकल प्रमाणपत्रों और लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच कराई जाए तो बड़े स्तर पर अनियमितताएं सामने आ सकती हैं।मामले को और गंभीर बनाते हुए उन्होंने कुछ अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। आरोप है कि जिन मोटर ड्राइविंग ट्रेनिंग स्कूलों के खिलाफ पहले कार्रवाई हो चुकी थी, उनसे जुड़े लोगों ने अपने परिजनों के नाम पर नए प्रशिक्षण केंद्र संचालित कर फिर से लाइसेंस प्रक्रिया में सक्रिय भूमिका निभाई। आरोपों के अनुसार इन केंद्रों से जारी प्रमाणपत्रों के आधार पर बड़ी संख्या में व्यावसायिक लाइसेंस बनाए गए।उल्लेखनीय है कि वर्ष 2024 में उन्नाव के दो मोटर ड्राइविंग ट्रेनिंग स्कूलों पर फर्जी प्रशिक्षण प्रमाणपत्र जारी करने के आरोप सिद्ध होने के बाद उनके लाइसेंस निरस्त किए गए थे। अब आरोप लगाया जा रहा है कि उन्हीं लोगों ने अपने परिजनों के नाम पर नए संस्थान संचालित कर व्यवस्था में दोबारा प्रवेश कर लिया।यदि आरोपों में सच्चाई पाई जाती है तो यह मामला केवल विभागीय लापरवाही तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सड़क सुरक्षा और आम नागरिकों के जीवन से जुड़ा गंभीर मुद्दा बन सकता है। बिना उचित प्रशिक्षण और मेडिकल परीक्षण के व्यावसायिक लाइसेंस जारी होना सड़क दुर्घटनाओं की आशंका को बढ़ा सकता है।हालांकि, इन आरोपों की अभी तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। संबंधित अधिकारियों की ओर से भी कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल उन्नाव का परिवहन विभाग गंभीर सवालों के घेरे में है और अब निगाहें शासन व विभागीय जांच पर टिकी हैं।

सवाल जो जवाब मांग रहे हैं
उन्नाव में वर्ष 2024 में दो ट्रेनिंग स्कूल बिना प्रशिक्षण में मानक से कई गुना अवैध तरह से फर्जी सर्टिफिकेट काट कर फर्जी कॉमर्सियल ड्राइविंग बनाने का गोरखधंधा बड़े स्तर पर संचालित था जिसके बाद ट्रांसपोर्ट कमिश्नर के आदेश पर जाँच के दौरान दोषी पाए जाने पर उन्नाव मोटर ड्राइविंग ट्रेंनिग स्कूल -फरीद अहमद और न्यू वाशू मोटर ड्राइविंग ट्रेनिंग स्कूल डीह निवासी वाशू उर्फ प्रशांत द्विवेदी के ट्रेनिंग स्कूल के लाइसेंस निरस्त किये जा चुके। वही निरस्तीकरण के बाद भी विभागीय अधिकारियों ने मोटी रकम लेकर महज कुछ दिनों में ही दोषी फरीद अहमद अपने भाई के नाम हाईटेक मोटर ड्राइविंग ट्रेनिंग स्कूल खुलवा दिया वही वाशू प्रशांत द्विवेदी ने भी अपने भाई डीह निवासी विनीत द्विवेदी के नाम ब्योम मोटर ड्राइविंग ट्रेनिंग स्कूल खुलवा दिए हालांकि इन स्कूलों का संचालन कोई और यही बल्कि फर्जीवाड़ा कांड करने वाले दोषियों ने अपने भाइयों के नाम ट्रेनिग स्कूल खुलवा कर उनकी कमान खुद संभाल रखी है जिसके बाद एक बार फिर जनवरी 2026 में जून 2026 तक ट्रेनिंग स्कूलों के सर्टिफिकेट में बड़े पैमाने पर फर्जी मेडिकल सर्टिफिकेट लगाए गए और इन अवैध कार्यों को अंजाम देने एआरटीओ स्वेता वर्मा और अमिता तिवारी, सुभम देव दिवारी शामिल सहित तमाम अधिकारी शामिल है

 


दोषियों ने अपने भाइयों के नाम खोले मानकविहीन ट्रेनिंग स्कूल,और कर दिया बड़ा फर्जीवाड़ा
दरसअल उन्नाव जनपद में पांच मोटर ड्राइविंग ट्रेनिंग स्कूल है। पहला -हाईटेक मोटर ड्राइविंग ट्रेनिंग स्कूल और दूसरा ब्योम मोटर ड्राइविंग ट्रेनिंग स्कूल तीसरा सहारा मोटर ड्राइविंग ट्रेनिंग स्कूल चौथा बाला जी मोटर ड्राइविंग ट्रेनिंग स्कूल पांचवा न्यू अरनव मोटर ड्राइविंग ट्रेनिंग स्कूल संचालित है। वही वर्ष 2024 में हाईटेक ट्रेनिंग स्कूल और ब्योम ट्रेनिंग स्कूल के भाइयों ने बड़ी संख्या में फर्जी ट्रेनिंग सर्टिफिकेट जारी कर बड़ा फर्जीवाड़ा खेल को अंजाम दिया जिसके बाद दो दोषी पाए जाने पर ट्रांसपोर्ट कमिश्नर ने दोनों ट्रेनिंग स्कूल के लाइसेंस निरस्त कर दिए थे जबकि क़ानूनी कार्यवाई न होने से लगातार फर्जीवाड़े कांड पर रोक लगाना बेहद मुश्किल है और ऐसे में लगातार सड़को पर बड़ी संख्या में सड़क हादसे में बढ़ोतरी हो रही है।