
PARDARSHI VIKASH NEWS देश में थोक महंगाई (WPI) मई में बढ़कर 9.68% पर पहुंच गई है, जो पिछले 43 महीनों का सबसे ऊंचा स्तर है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल में यह दर 8.26% थी। सितंबर 2022 के बाद यह सबसे तेज बढ़ोतरी मानी जा रही है।महंगाई बढ़ने के पीछे मुख्य कारण रोजमर्रा की जरूरत की वस्तुओं, ईंधन और खाद्य पदार्थों की कीमतों में तेज वृद्धि बताई जा रही है। खासकर अनाज, खाद्य तेल और पेट्रोलियम उत्पादों के दामों में बढ़ोतरी का सीधा असर थोक बाजार पर पड़ा है। फ्यूल और पावर की महंगाई दर 30.33% तक पहुंच गई है, जबकि फूड आइटम्स की महंगाई 4.49% दर्ज की गई है।आंकड़ों के अनुसार, मैन्युफैक्चर्ड प्रोडक्ट्स की महंगाई भी बढ़कर 7.48% हो गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक स्तर पर ऊर्जा बाजार में अस्थिरता और भू-राजनीतिक तनाव, खासकर अमेरिका-ईरान विवाद, ने सप्लाई चेन पर दबाव बढ़ाया है, जिससे कीमतों में तेजी आई है।थोक महंगाई बढ़ने का असर धीरे-धीरे खुदरा बाजार पर भी दिखाई दे सकता है, क्योंकि उत्पादक बढ़ी हुई लागत का बोझ उपभोक्ताओं पर डाल सकते हैं। हालांकि, सरकार सीमित स्तर पर टैक्स और नीतिगत उपायों के जरिए स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास कर सकती है।उधर, मई में खुदरा महंगाई (CPI) भी बढ़कर 3.93% हो गई है, जो पिछले पांच महीनों में सबसे अधिक है और RBI के 4% लक्ष्य के करीब पहुंच गई है।