
पारदर्शी विकास न्यूज़ बांदा। शिल्पा कुशवाहा ने अपने हुनर और मेहनत के दम पर न केवल खुद को आत्मनिर्भर बनाया, बल्कि गांव की कई महिलाओं की जिंदगी भी बदल दी। कुमहेड़ा गांव की रहने वाली शिल्पा आज बुंदेलखंड के पारंपरिक उत्पादों को नई पहचान दिला रही हैं। उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन से प्रशिक्षण मिलने के बाद शिल्पा ने कठिया गेहूं से दलिया बनाने का काम शुरू किया। बाद में उन्होंने “देहाती” ब्रांड के तहत दलिया, अचार, सत्तू, मसाले और बुकनू जैसे उत्पाद तैयार करना शुरू किया। शुरुआत में बाजार तक पहुंच बनाना मुश्किल था, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और गांव-गांव जाकर खुद सामान बेचा।साल 2020 में शिल्पा ने “प्रगति महिला स्वयं सहायता समूह” का गठन किया। समूह को सरकारी योजनाओं के तहत पहले 20 हजार रुपये, फिर 30 हजार, 50 हजार और बाद में 2 लाख रुपये का लोन मिला। इससे कारोबार का विस्तार हुआ और आज समूह से 11 महिलाएं सीधे जुड़ी हैं, जबकि करीब दो दर्जन अन्य महिलाएं भी रोजगार पा रही हैं।शिल्पा ने बताया कि उन्हें हर महीने करीब 20 हजार रुपये का मुनाफा हो जाता है, वहीं समूह से जुड़ी महिलाओं को भी तीन से चार हजार रुपये तक की आमदनी मिल रही है।ग्रामीण महिलाओं के लिए शिल्पा की सफलता प्रेरणा बन गई है। उनकी कहानी साबित करती है कि सही प्रशिक्षण और सरकारी योजनाओं का लाभ मिल जाए तो महिलाएं आत्मनिर्भर बनकर अपनी और दूसरों की जिंदगी बदल सकती हैं।