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सुपर एल-नीनो के बीच जलवायु-स्मार्ट खेती को बढ़ावा देगा बीएचयू

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PARDARSHI VIKASH NEWS वाराणसी । काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के कृषि विज्ञान संस्थान द्वारा शताब्दी कृषि प्रेक्षागृह में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला "सुपर एल-नीनो वर्ष 2026 में धान की सीधी बुवाई एवं वैकल्पिक फसलें" का आज भव्य शुभारम्भ हुआ। कार्यशाला का उद्देश्य सुपर एल नीनो का जलवायु परिवर्तन, जल संकट तथा कृषि क्षेत्र के समक्ष उभरती चुनौतियों के समाधान हेतु वैज्ञानिक तकनीकों, प्रत्यक्ष बुवाई धान (डीएसआर) तथा वैकल्पिक फसल प्रणालियों को बढ़ावा देना है।कार्यक्रम के मुख्य अतिथि उत्तर प्रदेश सरकार के कृषि, कृषि शिक्षा एवं कृषि अनुसंधान मंत्री श्री सूर्य प्रताप शाही रहे, जबकि कार्यक्रम की अध्यक्षता काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अजीत कुमार चतुर्वेदी ने की। विशिष्ट अतिथि के रूप में डॉ. बी. एन. सिंह, पूर्व निदेशक, आईसीएआर-राष्ट्रीय धान अनुसंधान संस्थान (एनआरआरआई), कटक तथा प्रो. ज्ञानेन्द्र प्रताप सिंह, कुलपति, आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, अयोध्या उपस्थित रहे।कार्यक्रम का शुभारम्भ महामना पंडित मदन मोहन मालवीय जी की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं कुलगीत के साथ हुआ। अतिथियों का स्वागत एवं सम्मान किया गया।स्वागत उद्बोधन प्रस्तुत करते हुए प्रो. यू. पी. सिंह, निदेशक, कृषि विज्ञान संस्थान, बीएचयू ने कहा कि धान की सीधी बुवाई वर्तमान समय की आवश्यकता है, जो जल संरक्षण, श्रम लागत में कमी तथा समयबद्ध फसल प्रबंधन के माध्यम से कृषि को अधिक टिकाऊ और लाभकारी बना सकती है। उन्होंने कहा कि सुपर एल-नीनो जैसी परिस्थितियों में वैज्ञानिक खेती और वैकल्पिक फसल प्रणाली किसानों के लिए सुरक्षा कवच का कार्य कर सकती है।अपने संबोधन में डॉ. बी. एन. सिंह ने वर्षा आधारित एवं सिंचित परिस्थितियों में धान की सीधी बुवाई की उपयोगिता, तकनीकी आवश्यकताओं तथा भविष्य की संभावनाओं पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने के लिए पारम्परिक कृषि पद्धतियों के साथ-साथ नवाचार आधारित तकनीकों को अपनाना समय की मांग है।