
PARDARSHI VIKASH NEWS उत्तर प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय (सैफई) के रेडियोलॉजी विभाग में एक्स-रे जांच व्यवस्था गंभीर संकट से जूझ रही है। संस्थान की करीब आधा दर्जन डिजिटल रेडियोग्राफी (डीआर) मशीनें लंबे समय से खराब पड़ी हैं, जिससे मरीजों की जांच पोर्टेबल एक्स-रे मशीनों के सहारे की जा रही है। इसका असर जांच की गति पर पड़ा है और मरीजों को घंटों लाइन में इंतजार करना पड़ रहा है।शुक्रवार को विभाग में कई एक्स-रे कक्ष बंद मिले। पुरानी बिल्डिंग के कमरा नंबर 47 और 38 की मशीनें खराब थीं, जबकि कमरा नंबर 39 पर ताला लटका मिला। ट्रामा सेंटर में भी कमरा नंबर 11 बंद था और कमरा नंबर 12 में पोर्टेबल मशीन से जांच की जा रही थी। ओपीडी में भी मरीजों की बढ़ती भीड़ के बीच पोर्टेबल मशीनों का ही उपयोग किया जा रहा है।विशेषज्ञों के अनुसार, जहां डीआर मशीन एक मरीज का एक्स-रे लगभग एक मिनट में कर देती है, वहीं पोर्टेबल मशीन से एक जांच में 5 से 7 मिनट का समय लग जाता है। इससे मरीजों की लंबी कतारें लग रही हैं और इलाज शुरू होने में देरी हो रही है।स्थिति तब और गंभीर हो जाती है जब पोर्टेबल मशीनें भी बीच-बीच में खराब हो जाती हैं। हड्डियों की जांच के लिए इस्तेमाल होने वाली डेक्सा मशीन भी अक्सर खराब रहने से मरीजों को अतिरिक्त परेशानी उठानी पड़ रही है। वहीं मानव संसाधन की कमी के चलते तकनीकी कार्यों में भी अनियमितताएं सामने आई हैं।मरीजों और तीमारदारों का कहना है कि उन्हें जांच के लिए अलग-अलग कमरों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। कई गंभीर मरीज स्ट्रेचर पर घंटों इंतजार करने को मजबूर हैं। मशीनों की खराबी के कारण कुछ विशेष जांचों के लिए मरीजों को सुपर स्पेशलिटी अस्पताल भेजा जा रहा है, जिससे समय और परेशानी दोनों बढ़ रही हैं।