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रजिस्ट्री के निजीकरण के विरोध में कप्तानगंज के अधिवक्ता लामबंद

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बोले—हजारों परिवारों की आजीविका पर पड़ेगा असर, मांगें नहीं मानी गईं तो होगा प्रदेशव्यापी आंदोलन

पारदर्शी विकास ब्यूरो कप्तानगंज (कुशीनगर)। रजिस्ट्री व्यवस्था के प्रस्तावित निजीकरण के विरोध में सोमवार को कप्तानगंज कलेक्ट्रेट बार एसोसिएशन के अधिवक्ताओं और रजिस्ट्री कार्य से जुड़े पेशेवरों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। बार एसोसिएशन की बैठक में अधिवक्ताओं, दस्तावेज लेखकों, स्टाम्प विक्रेताओं और मुंशियों ने एक स्वर में प्रस्ताव का विरोध करते हुए इसे तत्काल वापस लेने की मांग की। बैठक के बाद मुख्यमंत्री के नाम संबोधित ज्ञापन उपजिलाधिकारी मोहम्मद जफर को सौंपा गया।बार एसोसिएशन के अध्यक्ष हीरा पाण्डेय की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में प्रस्तावित निजीकरण के संभावित प्रभावों पर विस्तार से चर्चा हुई। वक्ताओं ने कहा कि यदि रजिस्ट्री व्यवस्था का निजीकरण किया गया तो दस्तावेज लेखक, स्टाम्प विक्रेता, मुंशी तथा अधिवक्ताओं सहित हजारों लोगों की आजीविका प्रभावित होगी और बड़ी संख्या में परिवार रोजगार संकट का सामना करेंगे।बैठक में यह भी आशंका जताई गई कि निजीकरण से भूमि संबंधी दस्तावेजों में अनियमितता और फर्जीवाड़े की संभावनाएं बढ़ सकती हैं, जिससे भविष्य में भूमि विवादों में वृद्धि होगी और प्रशासन पर अतिरिक्त दबाव पड़ेगा। अधिवक्ताओं ने कहा कि किसी भी नई व्यवस्था को लागू करने से पहले उससे जुड़े सभी हितधारकों से व्यापक संवाद किया जाना चाहिए।बैठक के उपरांत मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन उपजिलाधिकारी मोहम्मद जफर को सौंपते हुए सरकार से प्रस्ताव पर पुनर्विचार करने और इसे तत्काल वापस लेने की मांग की गई। अधिवक्ताओं ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया तो प्रदेश स्तर पर व्यापक आंदोलन शुरू किया जाएगा।बैठक में मिर्जा एक्तेदार हुसैन, विनोद कुमार मिश्रा, उमेश चन्द्र दूबे, राजन पाण्डेय, सतीश चंद्र गोंड, लालमन सिंह, गोविन्द कुमार, मनोज कुमार, दारा यादव, दिवाकर गुप्ता सहित बड़ी संख्या में अधिवक्ता एवं रजिस्ट्री कार्य से जुड़े लोग उपस्थित रहे।