
सपा, कांग्रेस और बसपा से एक साथ निपटने की तैयारी
नयी टीम में अमेठी और सुल्तानपुर को जगह नहीं, सुर्खियों में है गोविंद नारायण शुक्ला को बाहर किया जाना
PARDARSHI VIKASH NEWS लखनऊ। भाजपा की संगठन की नई टीम 2027के विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखकर बनाई गई है। क्षेत्रीय समीकरणों के बजाय इस बार भाजपा ने सामाजिक समीकरणों को केंद्र बिंदु में रखकर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भाजपा से लम्बे समय से जुड़े कार्यकर्ताओं को नये चेहरे के रूप में आगे बढ़ाया है। लम्बे समय से संगठन में जमे रहे कई दिग्गजों को बाहर करके पार्टी नेतृत्व उनको दूसरा दायित्व देने की तैयारी कर रहा है। पिछले वर्ष भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष की लाइन में रहे एम एल सी और प्रदेश महामंत्री गोविंद नारायण को टीम से बाहर रखने का निर्णय सबसे चौंकाने वाला है। बहुजन समाज पार्टी के साथ सर्वसमाज के बढ़ते एलाइंस को देखते हुए भाजपा ने ओबीसी की कई जातियों को नेताओं को संगठन में आगे बढ़ाया है।सपा के पीडीए की हवा निकालने की पूरी तैयारी के साथ प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने अपनी नई टीम घोषित की है। उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से पिछले मंत्रिमंडल विस्तार के दौरान भी सामाजिक समीकरणों को फोकस करते हुए भाजपा ने नये मंत्री बनाए थे। मंत्रिमंडल के विस्तार के समय भाजपा ने जो रणनीति अपनाई थी, लगभग वही रणनीति संगठन की नई टीम की घोषणा में भी सामने आई है।
बसपा की तैयारी पर गंभीर है भाजपा
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में ओबीसी सबसे बड़ा वोट बैंक है। 2007में यह वोट बैंक बसपा के साथ था। ब्राह्मण समाज का आशीर्वाद बसपा को मिल गया और बी एस पी ने पूर्ण बहुमत की सरकार बना ली। सूत्रों का कहना है कि2017मे यूपी की सत्ता में वापस आने के बाद भारतीय जनता पार्टी के शीर्ष नेतृत्व और थिंक टैंक ने इस बैंक को बसपा से छीनने की रणनीति अपनाई और पिछले दो विधानसभा चुनावों में काफी सफलता अर्जित की।इस वोट बैंक को साधने के लिए सपा ने पीडीए का नारा दिया है। बसपा भाईचारा कमेटियों के माध्यम से 2007की तरह सर्वसमाज का एलाइंस खड़ा कर रही है।हाल ही में बीकापुर और अम्बेडकरनगर में हुए दो बड़े कार्यक्रमों में उमड़ी भीड़ ने बसपा के पक्ष में माहौल बनने के स्पष्ट संकेत दिए हैं।
भाजपा की नई प्रदेश टीम में अमेठी-सुल्तानपुर की अनदेखी? गोविंद नारायण शुक्ला को भी नहीं मिली जगह
अमेठी/लखनऊ। भारतीय जनता पार्टी की नई प्रदेश कार्यकारिणी की घोषणा के बाद अमेठी और सुल्तानपुर के राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है। नई टीम में न तो अमेठी और न ही सुल्तानपुर जिले से किसी नेता को प्रदेश पदाधिकारी बनाया गया है। वहीं, पूर्व प्रदेश महामंत्री और संगठन में लंबे समय तक प्रभावशाली भूमिका निभाने वाले गोविंद नारायण शुक्ला को भी नई टीम में स्थान नहीं मिला है।अमेठी और सुल्तानपुर भाजपा के लिए राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण जिले माने जाते हैं। अमेठी राष्ट्रीय स्तर पर गांधी परिवार के राजनीतिक गढ़ के रूप में पहचान रखता है, जबकि सुल्तानपुर भी अवध क्षेत्र की प्रमुख राजनीतिक सीटों में शामिल है। ऐसे में दोनों जिलों का प्रदेश संगठन में प्रतिनिधित्व न होना स्थानीय कार्यकर्ताओं और नेताओं के बीच चर्चा का विषय बन गया है।राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा ने 2027 के विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए सामाजिक और क्षेत्रीय समीकरणों के आधार पर नई टीम का गठन किया है। संगठन में बड़ी संख्या में नए चेहरों को अवसर दिया गया है और विभिन्न वर्गों के प्रतिनिधित्व को संतुलित करने का प्रयास किया गया है। इसके बावजूद अमेठी और सुल्तानपुर से किसी प्रमुख चेहरे को स्थान न मिलने पर सवाल उठ रहे हैं।गोविंद नारायण शुक्ला को भाजपा संगठन का अनुभवी और मजबूत चेहरा माना जाता रहा है। प्रदेश महामंत्री सहित कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल चुके शुक्ला अवध क्षेत्र में संगठनात्मक पकड़ रखने वाले नेताओं में गिने जाते हैं। उनके नई टीम में शामिल न होने को लेकर भी कार्यकर्ताओं के बीच अलग-अलग तरह की चर्चाएं हैं। हालांकि पार्टी की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक कारण नहीं बताया गया है।स्थानीय भाजपा कार्यकर्ताओं का कहना है कि अमेठी और सुल्तानपुर जैसे महत्वपूर्ण जिलों को प्रदेश संगठन में प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए था। वहीं पार्टी के जानकारों का मानना है कि संगठन में फेरबदल का यह दौर अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है और भविष्य में विभिन्न समितियों, आयोगों, निगमों तथा चुनावी प्रबंधन से जुड़ी जिम्मेदारियों में इन जिलों के नेताओं को अवसर मिल सकता है।राजनीतिक पर्यवेक्षकों के अनुसार, नई टीम के गठन से यह संदेश जरूर गया है कि भाजपा 2027 के चुनाव से पहले संगठन में व्यापक बदलाव और नए नेतृत्व को आगे बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रही है। हालांकि अमेठी और सुल्तानपुर में कार्यकर्ताओं की प्रतिक्रिया आने वाले दिनों में संगठन के लिए महत्वपूर्ण संकेत दे सकती है।