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कनाडा के अल्बर्टा में अलग देश बनने की मांग तेज, 3 लाख हस्ताक्षर सौंपे; जनमत संग्रह की प्रक्रिया शुरू होने की संभावना

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PARDARSHI VIKASH NEWS कनाडा के पश्चिमी प्रांत अल्बर्टा में अलग देश बनने की मांग एक बार फिर तेज हो गई है, जहां अलगाववादी समूहों ने दावा किया है कि उन्होंने जनमत संग्रह कराने के लिए जरूरी संख्या से कहीं ज्यादा लगभग 3 लाख हस्ताक्षर चुनाव अधिकारियों को सौंप दिए हैं। यह संख्या निर्धारित 1.78 लाख की न्यूनतम सीमा से काफी अधिक है, जिसके बाद अब इस प्रस्ताव की कानूनी जांच और प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है।अलगाववादी नेताओं का कहना है कि यह आंदोलन अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुका है और अगर सभी कानूनी अड़चनें दूर हो जाती हैं तो 19 अक्टूबर को प्रस्तावित जनमत संग्रह में अल्बर्टा की स्वतंत्रता पर वोटिंग कराई जा सकती है। हालांकि अभी इस प्रक्रिया पर अदालत की रोक भी लागू है और चुनाव आयोग द्वारा हस्ताक्षरों की सत्यता की जांच की जाएगी, जिसके बाद ही आगे की कार्रवाई तय होगी।फिलहाल सर्वे बताते हैं कि केवल लगभग 30 प्रतिशत लोग ही अलग देश बनने के पक्ष में हैं, जिससे साफ है कि जनमत संग्रह में जीत हासिल करना आसान नहीं होगा। इसके बावजूद आंदोलन के नेता इसे ऐतिहासिक कदम बता रहे हैं और दावा कर रहे हैं कि समय के साथ समर्थन बढ़ेगा।अल्बर्टा में लंबे समय से केंद्र सरकार से असंतोष की भावना रही है, जहां तेल और गैस जैसे प्राकृतिक संसाधनों से होने वाली आय के वितरण और टैक्स नीति को लेकर विवाद चलता रहा है। स्थानीय लोगों का मानना है कि उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होने के बावजूद फैसले ओटावा में लिए जाते हैं, जिससे क्षेत्रीय हितों की अनदेखी होती है।इसके अलावा पर्यावरण और ऊर्जा नीतियों को लेकर भी केंद्र और प्रांत के बीच टकराव देखा गया है, जबकि राजनीतिक और सांस्कृतिक रूप से भी अल्बर्टा खुद को कनाडा के बाकी हिस्सों से अलग मानता रहा है।इसी बीच अमेरिका से जुड़े राजनीतिक संकेतों और समर्थन की चर्चाओं ने भी इस मुद्दे को और जटिल बना दिया है, हालांकि कनाडा सरकार ने स्पष्ट किया है कि देश की संप्रभुता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा और किसी भी तरह के अलगाव के लिए कड़े कानूनी मानकों का पालन जरूरी होगा।