
पारदर्शी विकास न्यूज़ कानपुर। ग्वालटोली थाना क्षेत्र में मानवता और संवेदनशील पुलिसिंग की एक मिसाल देखने को मिली। यहां महिला कॉन्स्टेबल मंदाकिनी ने एक लापता मूक-बधिर बच्ची को न सिर्फ मां की ममता जैसा स्नेह दिया, बल्कि सोशल मीडिया की मदद से उसे उसके परिवार से भी मिलवा दिया।जानकारी के अनुसार, 8 वर्षीय मूक-बधिर बच्ची परवीन खेलते-खेलते एक धार्मिक जुलूस के पीछे घर से दूर निकल गई थी। देर रात गश्त के दौरान पुलिस को वह सड़क किनारे अकेली बैठी मिली। बच्ची बोल और सुन नहीं सकती थी, इसलिए वह अपने घर का पता भी नहीं बता सकी। पुलिस उसे ग्वालटोली थाने लेकर आई।अगली सुबह महिला हेल्प डेस्क पर तैनात कॉन्स्टेबल मंदाकिनी की नजर बच्ची पर पड़ी। बच्ची ने इशारों में भूख लगने की बात कही, जिसके बाद मंदाकिनी ने उसे खाना खिलाया, नहलाया और नए कपड़े पहनाए। बच्ची के प्रति उनका स्नेह देखकर थाने का पूरा स्टाफ भावुक हो गया।इसके बाद बच्ची के परिजनों की तलाश के लिए उसकी एक वीडियो रील इंस्टाग्राम पर पोस्ट की गई। रील तेजी से वायरल हुई और 24 घंटे के भीतर बच्ची की मां रेशमा खातून तक पहुंच गई। वीडियो देखते ही मां ने बच्ची को पहचान लिया और तुरंत थाने पहुंच गई।थाने में मां को देखते ही बच्ची दौड़कर उनसे लिपट गई। मां-बेटी के मिलन का भावुक दृश्य देखकर वहां मौजूद पुलिसकर्मियों की आंखें भी नम हो गईं।कॉन्स्टेबल मंदाकिनी ने कहा, "बच्ची में मुझे अपनी बेटी दिखाई दी। मेरे दो बेटे हैं, बेटी नहीं है। हमने सोचा था कि अगर इसका कोई नहीं मिला तो मैं इसे अपनी बेटी की तरह पालूंगी।"मानवता और कर्तव्यनिष्ठा का यह उदाहरण अब पूरे शहर में चर्चा का विषय बना हुआ है।