
बाजार के शीतल पेयों की जगह फलों से खुद तैयार करें शीतल पेय
नरेंद्र देव कृषि विश्वविद्यालय के छात्र सत्यांशु सिंह ने दी सेहत के लिए उपयोगी जानकारी
PARDARSHI VIKASH NEWS भीषण गर्मी में शीतल पेयों की मांग बढ़ी हुई हैं। शीतल पेयों का सावधानीपूर्वक इस्तेमाल न करने से स्वास्थ्य के लिए समस्या हो सकती है। नरेंद्र देव कृषि विश्वविद्यालय के शोध छात्र सत्याशु सिंह ने गर्मियों में फल आधारित पेयों का प्रयोग करने की सलाह दी है। उन्होंने कहा है कि फल आधारित पेय स्वाद और स्वास्थ्य के प्राकृतिक संगम के रूप में काम करते हैं।गर्मियों में शरीर को सबसे अधिक आवश्यकता पानी, खनिज लवण और हल्के पोषण की होती है। तेज धूप, पसीना और बढ़ा हुआ तापमान शरीर से जल के साथ सोडियम, पोटैशियम और अन्य इलेक्ट्रोलाइट्स भी कम कर देते हैं। ऐसे समय में फल आधारित पेय केवल स्वाद नहीं देते, बल्कि शरीर को ठंडक, ऊर्जा और पोषण भी प्रदान करते हैं।भारत में गर्मियों के पारंपरिक पेय आम पना, बेल शर्बत, नींबू पानी, तरबूज जूस, नारियल पानी, छाछ के साथ फल मिश्रण और खीरा-पुदीना पेय पीढ़ियों से उपयोग में हैं। इनका वैज्ञानिक आधार भी मजबूत है। फल और सब्जियाँ विटामिन, खनिज और फाइबर के अच्छे स्रोत माने जाते हैं, जो संतुलित आहार का महत्त्वपूर्ण हिस्सा हैं।गर्मी में तरबूज, खरबूजा, संतरा, मौसमी, अनार, आम, बेल और नींबू जैसे फल उपयोगी है। इनमें पानी की मात्रा अधिक होती है और कई फलों में विटामिन बीटा कैरोटीन, पोटैशियम और प्राकृ तिक शर्करा पाई जाती है। प्राकृतिक फल रस शरीर को तुरंत ऊर्जा देते हैं, जबकि पोटैशियम मांसपेशियों और तंत्रिका क्रिया में सहायक होता है। भारतीय पोषण दिशानिर्देशों के अनुसार प्राकृ तिक फलों के रस विटामिन और खनिज प्रदान करते हैं, लेकिन उन्हें पूरे फल का पूर्ण विकल्प नहीं माना जा सकता क्योंकि पूरे फल में फाइबर अधिक होता है।फल आधारित पेय बनाते समय सबसे बड़ी सावधानी चीनी को लेकर रखनी चाहिए। बाजार में मिलने वाले पैक्ड जूस, फ्लेवर्ड ड्रिंक और कार्बोनेटेड पेय अक्सर अधिक शक्कर, रंग और कृत्रिम स्वाद से भरे होते हैं। ये प्यास तो कुछ समय के लिए शांत करते हैं, पर शरीर को वास्तविक पोषण कम देते हैं। अधिक मुक्त शर्करा मोटापा, दांतों की समस्या और जीवनशैली रोगों का जोखिम बढ़ा सकती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने मुक्त शर्करा को सीमित रखने की सलाह दी है।गर्मियों में घर पर बने पेय सबसे बेहतर विकल्प हैं। आम पना कच्चे आम, भुना जीरा, पुदीना और थोड़ा-सा काला नमक मिलाकर बनाया जा सकता है। यह स्वाद में खट्टा-मीठा होता है और लू से बचाव में पारंपरिक रूप से उपयोगी माना जाता है। नींबू पानी में चीनी की जगह सीमित मात्रा में शहद या केवल नमक-जीरा मिलाकर भी पिया जा सकता है। बेल का शर्बत पाचन के लिए हल्का और शीतल पेय माना जाता है। तरबूज-पुदीना पेय शरीर में पानी की पूर्ति के लिए अच्छा विकल्प है।नारियल पानी भी गर्मियों का श्रेष्ठ प्राकृतिक पेय है। इसमें पोटैशियम, सोडियम, कैल्शियम और मैग्नीशियम जैसे खनिज पाए जाते हैं और इसे शरीर को ठंडक देने वाला पेय माना जाता है। हालांकि जिन लोगों को किडनी रोग या पोटैशियम से जुड़ी समस्या हो, उन्हें इसका सेवन चिकित्सकीय सलाह से करना चाहिए।फल पेय को अधिक स्वास्थ्यकर बनाने के लिए कुछ सरल नियम अपनाने चाहिए। रस को छानने के बजाय गूदे सहित पिएँ ताकि फाइबर बना रहे। चीनी, कृत्रिम सिरप और सोडा मिलाने से बचें। बर्फ का उपयोग तभी करें जब पानी सुरक्षित हो। कटे हुए फल या तैयार पेय को लंबे समय तकखुला न रखें, क्योंकि गर्मी में सूक्ष्मजीव जल्दी बढ़ते हैं। पेय तैयार करने से पहले फल अच्छी तरह धोना जरूरी है।मधुमेह, मोटापा या उच्च रक्तचाप वाले लोगों को फल पेय की मात्रा और सामग्री पर ध्यान देना चाहिए। बहुत मीठे फलों का गाढ़ा रस बार-बार पीना उचित नहीं है। उनके लिए नींबू-पुदीना पानी, खीरा-पुदीना पेय, कम मीठा बेल शर्बत या पतला छाछ फल मिश्रण बेहतर विकल्प हो सकते हैं।फल आधारित पेय गर्मियों में स्वाद, परंपरा और विज्ञान का सुंदर मेल हैं। सही फल, कम चीनी, सुरक्षित पानी और ताजा तैयारी इन चार बातों का ध्यान रखा जाए तो ये पेय शरीर को तरावट, पोषण और आनंद तीनों दे सकते हैं। गर्मी से लड़ने का सबसे अच्छा तरीका महंगे पैक्ड ड्रिंक नहीं, बल्कि रसोई और मौसम के ताजे फलों से बना प्राकृतिक पेय है।