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गन्ने के साथ भिंडी की सहफसली खेती से किसान अरविंद ने लिखी समृद्धि की कहानी

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पारदर्शी विकास ब्यूरो कसया, कुशीनगर। कसया तहसील अंतर्गत आदर्श गन्ना ग्राम बकनहा के किसान अरविंद कुशवाहा ने गन्ने के साथ भिंडी की सहफसली खेती कर आर्थिक आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश की है। अपनी मेहनत और वैज्ञानिक खेती के जरिए वह प्रतिदिन 3,000 से 3,500 रुपये तक की आमदनी कर रहे हैं, जिससे न केवल उनका परिवार खुशहाल है बल्कि बच्चों की शिक्षा भी सुचारु रूप से चल रही है।अरविंद कुशवाहा ने 15 कट्ठा (60 डिसमिल) खेत में फरवरी माह में ट्रेंच विधि से गन्ने की बुवाई की। गन्ने की दो पंक्तियों के बीच भिंडी की एक पंक्ति लगाकर उन्होंने सहफसली खेती को अपनाया। उन्होंने गन्ने की को-0118 प्रजाति और भिंडी की ‘नव्या’ व ‘राधिका’ किस्म बोई। बुवाई के 35 से 40 दिनों के भीतर भिंडी की पैदावार शुरू हो गई, जिससे प्रतिदिन 50 से 60 किलोग्राम उत्पादन मिल रहा है। यह भिंडी स्थानीय बाजारों—बाड़ीपुल और अहिरौली में 40 से 50 रुपये प्रति किलो के हिसाब से बिक रही है।गन्ना किसान संस्थान प्रशिक्षण केंद्र, पिपराइच गोरखपुर के पूर्व सहायक निदेशक एवं गन्ना विकास सलाहकार ओम प्रकाश गुप्ता ने अरविंद के खेत का निरीक्षण कर सहफसली खेती को किसानों के लिए लाभकारी बताया। उन्होंने कहा कि इस तकनीक से किसान कम लागत में अधिक आय प्राप्त कर सकते हैं।अरविंद ने बताया कि वह सब्जी की खेती से अपने बेटे को अंग्रेजी माध्यम स्कूल में पढ़ा रहे हैं और बेटी को नीट की तैयारी करा रहे हैं। परिवार के सभी सदस्य खेती में सहयोग करते हैं और भिंडी, प्याज, फूलगोभी व सेम जैसी फसलों का उत्पादन कर बाजार में बिक्री करते हैं।इसी दौरान ओम प्रकाश गुप्ता ने किसान घनश्याम कुशवाहा के खेत का भी निरीक्षण किया और गन्ना बुवाई के आधुनिक उपकरणों व खरपतवार नियंत्रण के उपायों की जानकारी दी। वहीं नरेन्द्र कुशवाहा ने मुर्गीपालन के जरिए अतिरिक्त आय का उदाहरण प्रस्तुत किया।गांव में गन्ने की वैज्ञानिक खेती और सहायक व्यवसायों के चलते खुशहाली का माहौल है। विशेषज्ञों द्वारा समय-समय पर दी जा रही तकनीकी जानकारी किसानों के लिए लाभकारी साबित हो रही है।