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गीता जीवन जीने की शाश्वत कला

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पारदर्शी विकास न्यूज़ आगरा। महामना मालवीय मिशन, आगरा संभाग के तत्वावधान में शनिवार को संजय प्लेस स्थित यूथ हॉस्टल में 'श्रीमद्भगवद्गीता व्याख्यानमाला' का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का विषय "गीता की दृष्टि में–जीवन की सफलता व सार्थकता" रहा। शुभारंभ मां सरस्वती और महामना पंडित मदन मोहन मालवीय के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन से हुआ। इस अवसर पर मिशन की त्रैमासिक पत्रिका 'मिशन संदेश' का भी लोकार्पण किया गया।मुख्य वक्ता पूज्य आचार्य स्वामी कृष्णकांत जी ने कहा कि श्रीमद्भगवद्गीता केवल धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि संपूर्ण मानवता को जीवन जीने की शाश्वत कला सिखाने वाला ग्रंथ है। उन्होंने कर्मयोग, समत्व, आत्मानुशासन, कर्तव्यनिष्ठा और राष्ट्रसेवा को गीता का मूल संदेश बताते हुए कहा कि गीता का वास्तविक महत्व तभी है, जब उसके सिद्धांत हमारे व्यवहार में दिखाई दें।उन्होंने जीवन की सफलता के लिए चार महत्वपूर्ण सूत्र बताए— निर्णय लेने से पहले दोनों पक्षों को सुनना, निष्पक्ष निर्णय करना, मोह या भावनात्मक आवेश से बचना तथा संबंधों और मानवीय मूल्यों को सर्वोच्च स्थान देना।कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रो. (डॉ.) नरेश चन्द्र गौतम ने की। मिशन के उपाध्यक्ष प्रभाकर शर्मा (आईआरएस), महासचिव राकेश चन्द्र शुक्ला सहित बड़ी संख्या में शिक्षाविद, चिकित्सक, सामाजिक कार्यकर्ता, विद्यार्थी एवं मिशन के पदाधिकारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का समापन वंदे मातरम्, राष्ट्रगान और आभार ज्ञापन के साथ हुआ।