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‘एक-एक लाठी का हिसाब होगा’.................. जनता बदलाव के लिए तैयार:इमरान

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पारदर्शी विकास न्यूज़ कानपुर। कांग्रेस की ओर से कानपुर में ‘अल्पसंख्यकों का संकल्प, कांग्रेस ही विकल्प’ विषय पर सेमिनार आयोजित किया गया। कार्यक्रम में राज्यसभा सांसद एवं कांग्रेस अल्पसंख्यक विभाग के राष्ट्रीय अध्यक्ष इमरान प्रतापगढ़ी शामिल हुए। सेमिनार का आयोजन नवनियुक्त यूपी अल्पसंख्यक संयोजक सरदार अमनदीप ने किया।इमरान प्रतापगढ़ी ने छात्रों के प्रदर्शन और सरकार की कार्रवाई को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारी छात्रों पर लाठियां चलाई गईं, आंसू गैस और पेलेट गन का इस्तेमाल किया गया। उन्होंने कहा कि छात्र इन घटनाओं को भूलने वाले नहीं हैं और आने वाले चुनाव में इसका जवाब देंगे। उन्होंने दावा किया कि राहुल गांधी ने थाने में बैठकर साहिल नामक छात्र की एफआईआर दर्ज कराने में मदद की।सहारनपुर मस्जिद मामले को लेकर भी इमरान ने सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि 111 साल पुरानी मस्जिद को रात में गिराया गया और सरकार अपनी ताकत का दुरुपयोग कर रही है। उन्होंने कहा कि जनता अब ऐसे मुद्दों पर जागरूक हो चुकी है।कानपुर की सड़कों की बदहाली पर उन्होंने स्थानीय जनप्रतिनिधियों को घेरते हुए कहा कि शहर में इतने गड्ढे हैं कि समझ नहीं आता सड़क में गड्ढे हैं या गड्ढों में सड़क।उन्होंने GST, नोटबंदी और बेरोजगारी को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा। इमरान ने कहा कि दो करोड़ नौकरियों के वादे के हिसाब से 22 करोड़ नौकरियां सरकार पर उधार हैं। उन्होंने कहा कि व्यापारी, युवा, दलित, आदिवासी और अल्पसंख्यक समेत विभिन्न वर्ग बदलाव चाहते हैं। कार्यक्रम में कांग्रेस के पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे।

इनके वादे कोई नहीं भूला
उन्होंने कहा कि हालत ये है कि वादा किया करोड़ों का, काम दिया पकड़ो का, साथ दिया भगोड़ों का। ये सच्चाई है इनकी। साल 2013 में क्या-क्या वादा किया था ‘बहुत हुई महंगाई की मार’, ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ सब वादे याद हैं। कोई भी वादे नहीं भूला है।

22 करोड़ नौकरियां कंधे पर उधार हैं
इमरान ने कहा कि देश की जनता बदलाव चाहती है और ‘डबल इंजन’ सरकार के दोनों इंजन बदलने के लिए तैयार है। साल में सरकार ने 2 करोड़ नौकरी देने का दावा किया था, इस हिसाब से 22 करोड़ नौकरियां उधार हैं।



इमरान ने मंच से शेर पढ़ा…
कीमत तो बहुत बढ़ गई शहरों में धान की,
लेकिन बिदा न हो सकी बेटी किसान की।
मौका मिला तो लोगों ने कुर्सी के वास्ते,
तस्वीर ही बिगाड़ दी हिंदुस्तान की।