
पारदर्शी विकास न्यूज़ लखनऊ। डीएनटी (विमुक्त, घुमंतू एवं अर्धघुमंतू जनजाति) समुदाय को संवैधानिक संरक्षण प्रदान करने की मांग एक बार फिर जोर पकड़ने लगी है। डीएनटी डेवलपमेंट फाउंडेशन उत्तर प्रदेश के प्रमुख महामंत्री डॉ. रामानंद राजभर ने केंद्र सरकार से सर्वोच्च न्यायालय की संविधान पीठ के निर्देशों का पालन करते हुए वंचित समुदायों को मुख्यधारा में लाने के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की है। डॉ. राजभर ने कहा कि वर्ष 2020 में सर्वोच्च न्यायालय की संविधान पीठ ने अपने महत्वपूर्ण निर्णय में यह टिप्पणी की थी कि जिन जातियों को पिछले कई दशकों से आरक्षण का लाभ मिल रहा है, उनके संदर्भ में समीक्षा की आवश्यकता है तथा अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति की नई सूची तैयार करने पर विचार किया जाना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि इस निर्णय के कई वर्ष बीत जाने के बाद भी केंद्र सरकार द्वारा इस दिशा में अपेक्षित कार्रवाई नहीं की गई है।उन्होंने बताया कि संविधान पीठ में न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा, न्यायमूर्ति इंदिरा बनर्जी, न्यायमूर्ति विनीत सरन, न्यायमूर्ति एम.आर. शाह और न्यायमूर्ति अनिरुद्ध बोस शामिल थे। पीठ द्वारा दिए गए निर्देशों और टिप्पणियों के अनुरूप यदि व्यापक समीक्षा की जाए तो देश के विमुक्त, घुमंतू एवं अर्धघुमंतू समुदायों को भी उनके अधिकारों और विकास के अवसरों का लाभ मिल सकेगा।डॉ. रामानंद राजभर ने कहा कि राष्ट्रवादी सरकार बनने के बाद भी डीएनटी समुदाय के लोगों को अपेक्षाकृत लाभ अभी तक नहीं मिल पाया है। उनका कहना है कि देश का यह बड़ा वर्ग आज भी शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और सामाजिक सुरक्षा जैसी मूलभूत सुविधाओं से पूरी तरह नहीं जुड़ पाया है।उन्होंने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि डीएनटी समुदाय की सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक स्थिति का गंभीरता से अध्ययन कर उन्हें संवैधानिक संरक्षण प्रदान करने की दिशा में जल्द निर्णय लिया जाए। उनका मानना है कि इससे वर्षों से वंचित समुदायों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने में मदद मिलेगी और सामाजिक न्याय की अवधारणा को और अधिक मजबूती मिलेगी।डीएनटी डेवलपमेंट फाउंडेशन ने कहा कि समुदाय के अधिकारों और हितों की रक्षा के लिए संगठन भविष्य में भी अपनी आवाज बुलंद करता रहेगा तथा सरकार से सकारात्मक पहल की अपेक्षा रखता है।
मैं सरकार से मांग करता हूं कि संविधान पीठ के माननीय न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा जी जस्टिस इंदिरा बनर्जी जी जस्टिस विनीत शरण जी द्वारा आदेशित आदेश को सरकार शीघ्र ही लागू कराये, जिससे कि डीएनटी समाज को उनका पूर्ण हक मिल सके- रामानंद राजभर