
पारदर्शी विकास न्यूज़ कानपुर। ऐतिहासिक परेड मैदान में शनिवार को दुकानदारों के समर्थन में सपा और कांग्रेस विधायकों ने बड़ी बैठक की। यह बैठक नगर निगम द्वारा परेड बाजार की दुकानों को हटाने के नोटिस के बाद हुई, जिससे व्यापारियों में भारी आक्रोश देखा जा रहा है।शुक्रवार को नगर निगम की टीम ने परेड बाजार पहुंचकर माइक से घोषणा की थी कि दुकानदार 48 घंटे के भीतर अपनी दुकानें हटा लें, अन्यथा अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की जाएगी। इसके बाद से लगभग एक हजार छोटे दुकानदारों में भय और नाराजगी का माहौल है।परेड मैदान में लंबे समय से छोटे व्यापारी कपड़े, बैग और रोजमर्रा के सामान की बिक्री करते हैं। यह बाजार शहर के गरीब और मध्यम वर्ग के लोगों के लिए सस्ते सामान का बड़ा केंद्र माना जाता है। दुकानदारों का कहना है कि यह बाजार कई दशकों से यहां लग रहा है और उनकी आजीविका इसी पर निर्भर है।बैठक में मौजूद आर्यनगर विधायक अमिताभ बाजपेई ने कहा कि परेड बाजार केवल एक व्यापारिक स्थल नहीं, बल्कि कानपुर की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान है। उन्होंने आरोप लगाया कि नगर निगम द्वारा बिना उचित संवाद के अचानक कार्रवाई की जा रही है, जो गरीब दुकानदारों के हितों के खिलाफ है।विधायक ने यह भी कहा कि यह स्थान ऐतिहासिक परंपराओं से जुड़ा हुआ है, जहां रामलीला, धार्मिक जुलूस और सामाजिक आयोजन होते रहे हैं। ऐसे में इस बाजार को हटाना उचित नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जनप्रतिनिधि दुकानदारों के साथ खड़े हैं और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए कानूनी और लोकतांत्रिक लड़ाई लड़ी जाएगी।बैठक में सपा के तीनों विधायक और कांग्रेस के पदाधिकारी भी शामिल रहे। सभी ने एक स्वर में कहा कि वे दुकानदारों के साथ हैं और किसी भी कीमत पर दुकानें हटने नहीं दी जाएंगी।विधायकों ने नगर निगम से अपील की कि वह इस मामले में पुनर्विचार करे और दुकानदारों, स्थानीय लोगों तथा जनप्रतिनिधियों से बातचीत कर स्थायी समाधान निकाले। फिलहाल परेड बाजार में तनावपूर्ण माहौल बना हुआ है, जबकि प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए है।
“परेड बाजार सिर्फ एक बाजार नहीं, कानपुर की ऐतिहासिक पहचान और हजारों गरीब परिवारों की रोजी-रोटी है। नगर निगम का अचानक 48 घंटे में दुकानें हटाने का आदेश पूरी तरह गलत है। हम किसी भी हालत में गरीब दुकानदारों के साथ खड़े हैं और उनकी लड़ाई लड़ते रहेंगे।”-विधायक अमिताभ बाजपेई