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दशकों से नाव के सहारे जिंदगी, अब 705 करोड़ के पुल का इंतजार

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पारदर्शी विकास न्यूज़ कुशीनगर। कुशीनगर और महाराजगंज जिलों में नारायणी नदी के किनारे बसे करीब 50 हजार लोगों को आजादी के दशकों बाद भी पक्के पुल का इंतजार है। मरचहवा, शिवपुर, नारायणपुर, हरिहरपुर, सोहगीबरवा, शिकारपुर और पिपरासी समेत कई गांवों के लोग आज भी रोजगार, शिक्षा और इलाज के लिए नाव के सहारे नदी पार करते हैं।ग्रामीणों के लिए नदी पार करना रोजमर्रा की मजबूरी बन चुका है। किसान ट्रैक्टर और कृषि उपकरण तक नाव के जरिए नदी पार ले जाते हैं। बरसात में जलस्तर बढ़ने पर हालात और कठिन हो जाते हैं। मरीजों को इलाज के लिए ले जाना भी चुनौतीपूर्ण हो जाता हैलंबे समय से चली आ रही समस्या को देखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने 7 अप्रैल की कैबिनेट बैठक में नारायणी नदी पर पुल निर्माण को मंजूरी दी है। प्रस्तावित पुल पर करीब 705 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। मंजूरी के बाद अब ग्रामीणों की निगाहें निर्माण कार्य शुरू होने पर टिकी हैं।स्थानीय लोगों का कहना है कि पुल बनने से कुशीनगर और महाराजगंज के सीमावर्ती क्षेत्रों में आवागमन आसान होगा। शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार तक पहुंच बेहतर होने के साथ किसानों को भी राहत मिलेगी। नाव के सहारे जीवन गुजार रहे ग्रामीण अब इस महत्वाकांक्षी परियोजना के धरातल पर उतरने का इंतजार कर रहे हैं।