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शुद्धता के नाम पर मिठास में मिलावट?

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पारदर्शी विकास ब्यूरो  कुशीनगर। पूर्वांचल में अपनी मिठास के लिए पहचान रखने वाला गुड़ इन दिनों कुशीनगर में विवादों के केंद्र में आ गया है। जनपद के कोतवाली पडरौना क्षेत्र की ग्राम पंचायत जरार तथा थाना जटहां बाजार क्षेत्र में संचालित कुछ गुड़ निर्माण इकाइयों पर कथित रूप से मिलावटी गुड़ तैयार किए जाने के आरोप लगाए जा रहे हैं। स्थानीय लोगों का दावा है कि कुछ इकाइयों में गुड़ बनाने के दौरान मैदा, चीनी, टेमा और अन्य रासायनिक पदार्थों का इस्तेमाल किया जा रहा है, जबकि तैयार उत्पाद को ‘शुद्ध देशी गुड़’ और ‘स्पेशल गुड़’ के नाम से बाजार में उतारा जा रहा है।ग्रामीणों का आरोप है कि ऐसे गुड़ की खेप स्थानीय बाजारों के अलावा अन्य शहरों तक भी भेजी जा रही है। लोगों का कहना है कि यदि आरोप सही साबित होते हैं तो यह उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य के साथ बड़ा खिलवाड़ हो सकता है। खासकर बच्चों, बुजुर्गों और बीमार व्यक्तियों पर इसके प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका जताई जा रही है।मामले का एक दूसरा पहलू भी सामने आया है। क्षेत्रीय नागरिकों का कहना है कि गुड़ निर्माण इकाइयों से निकलने वाले अपशिष्ट और गंदगी के कारण आसपास मच्छरों का प्रकोप बढ़ रहा है। इससे स्थानीय लोगों को स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है और संक्रामक बीमारियों का खतरा भी बढ़ने की आशंका व्यक्त की जा रही है।ग्रामीणों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने खाद्य सुरक्षा विभाग तथा स्वास्थ्य विभाग से पूरे मामले की गहन जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि गुड़ के नमूनों की प्रयोगशाला में जांच कराई जाए और यदि किसी प्रकार की मिलावट पाई जाती है तो दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।हालांकि समाचार लिखे जाने तक संबंधित विभागों की ओर से कोई आधिकारिक बयान या पुष्टि सामने नहीं आई थी। ऐसे में आरोपों की सत्यता जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल क्षेत्र में इस मुद्दे को लेकर चर्चाओं का दौर तेज है और लोग प्रशासन की कार्रवाई का इंतजार कर रहे हैं।