
पारदर्शी विकास ब्यूरो कुशीनगर जनपद के विकास खण्ड नेबुआ नौरंगिया अंतर्गत ग्रामसभा पिपरा खुर्द टोला मंझरिया निवासी संजय मौर्य पुत्र सुरेश मौर्य इन दिनों गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। निर्धन परिवार से संबंध रखने वाले संजय मौर्य तमिलनाडु की एक सरिया फैक्ट्री में ठेकेदार के अधीन मजदूरी कर अपने परिवार का पालन-पोषण करते थे। इसी दौरान फैक्ट्री में काम करते समय उनके पैर में सरिया घुस जाने से वह गंभीर रूप से घायल हो गए।घटना के बाद संजय मौर्य घर लौट आए और इलाज के लिए गोरखपुर एम्स पहुंचे, जहां चिकित्सकों ने उनके पैर का ऑपरेशन करने की सलाह दी। परिवार ने किसी तरह लगभग तीन लाख रुपये की व्यवस्था कर ऑपरेशन कराया, लेकिन अब आर्थिक स्थिति पूरी तरह चरमरा गई है। संजय मौर्य के परिवार में चार पुत्रियां हैं, जिनकी उम्र क्रमशः 14, 13, 7 और 5 वर्ष बताई जा रही है। वहीं उनकी पत्नी की हालत भी गंभीर रही, क्योंकि गर्भ में पल रहे बच्चे की मृत्यु हो जाने के बाद ऑपरेशन के जरिए उसे निकाला गया, तब जाकर उनकी जान बच सकी।परिवार की दयनीय स्थिति की जानकारी मिलने पर भारतीय किसान यूनियन (जनकल्याण) के प्रदेश अध्यक्ष एवं खड्डा विधानसभा क्षेत्र 329 से भावी विधायक प्रत्याशी ने बुधवार को पीड़ित परिवार के घर पहुंचकर मुलाकात की और हरसंभव सहायता दिलाने का भरोसा दिया। उन्होंने कहा कि शासन-प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से परिवार की आर्थिक मदद कराने की अपील की जाएगी।इस दौरान उन्होंने कुशीनगर में रोजगार और उद्योगों की कमी का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि यदि जनपद में पर्याप्त उद्योग और कल-कारखाने होते तो यहां के मजदूरों और बेरोजगार युवाओं को रोजी-रोटी के लिए दूसरे राज्यों में पलायन नहीं करना पड़ता। उन्होंने आरोप लगाया कि कुशीनगर उद्योग विहीन जनपद बनकर रह गया है और वर्षों से जनप्रतिनिधियों ने किसानों, मजदूरों और बेरोजगार युवाओं के हित में ठोस प्रयास नहीं किए।उन्होंने बंद पड़ी चीनी मिलों का मुद्दा उठाते हुए कहा कि एक समय कुशीनगर में नौ चीनी मिलें संचालित होती थीं, लेकिन गलत नीतियों के कारण पांच चीनी मिलों को बंद कर औने-पौने दामों में बेच दिया गया। इसका सीधा असर किसानों, मजदूरों और युवाओं पर पड़ा है।उन्होंने प्रदेश सरकार से मांग की कि लक्ष्मीगंज बंद चीनी मिल समेत प्रदेश की अन्य बंद चीनी मिलों को पुनः चालू कराया जाए। साथ ही याद दिलाया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सितंबर 2021 में लखनऊ में आयोजित किसान सम्मेलन के दौरान बंद चीनी मिलों को दोबारा शुरू कराने का वादा किया था।