
कानपुर। इस बार रक्षाबंधन के पर्व पर औद्योगिक एवं व्यापारिक नगरी कानपुर के बाजारों में जबरदस्त रौनक देखने को मिली। कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के व्यापारिक आकलन के अनुसार, अकेले कानपुर में रक्षाबंधन के मौके पर करीब 300 करोड़ रुपये का कारोबार हुआ। राखियों के साथ मिठाई, ड्राई फ्रूट्स, कपड़े, आभूषण, इलेक्ट्रॉनिक्स और गिफ्ट आइटम्स की जमकर बिक्री हुई।शहर के थोक और खुदरा बाजारों में त्योहार से पहले ही खरीदारी का माहौल बन गया था। बड़ी संख्या में लोगों ने भाइयों और बहनों के लिए उपहार खरीदे, जिससे छोटे-बड़े व्यापारियों के साथ कारीगरों और दुकानदारों को भी अच्छा फायदा मिला। बाजारों में खासतौर पर डिजाइनर, हस्तनिर्मित और पारंपरिक राखियों की मांग अधिक रही।कैट के पदाधिकारियों के अनुसार, इस बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘वोकल फॉर लोकल’ अभियान का असर भी बाजार में साफ दिखाई दिया। लोगों ने विदेशी और चीनी उत्पादों के बजाय स्थानीय और स्वदेशी वस्तुओं को प्राथमिकता दी। महिला स्वयं सहायता समूहों, छोटे उद्यमियों और एमएसएमई सेक्टर द्वारा तैयार उत्पादों की मांग बढ़ने से स्थानीय कारोबारियों को सीधा आर्थिक लाभ मिला।कैट के अनुमान के मुताबिक, पूरे उत्तर प्रदेश में रक्षाबंधन के दौरान करीब 4,000 करोड़ रुपये का व्यापार हुआ। वहीं देशभर में राखी और उससे जुड़े उत्पादों का कारोबार लगभग 25,000 करोड़ रुपये तक पहुंचा। मिठाई, कपड़े, आभूषण, गिफ्ट पैक और इलेक्ट्रॉनिक्स समेत अन्य खरीदारी को जोड़कर देशभर में करीब 30,000 करोड़ रुपये की आर्थिक गतिविधि होने का अनुमान है।कैट के राष्ट्रीय संयुक्त महामंत्री पंकज अरोड़ा ने कहा कि भारतीय त्योहार केवल सांस्कृतिक परंपराओं तक सीमित नहीं हैं, बल्कि ये देश की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती देते हैं। रक्षाबंधन जैसे पर्व किसान, कारीगर, ट्रांसपोर्टर, छोटे दुकानदार और बड़े व्यापारियों समेत करोड़ों लोगों के लिए रोजगार और आय के अवसर पैदा करते हैं।