
पारदर्शी विकाश न्यूज़ लखनऊ। श्रीराम कथा के दौरान जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने रामराज्य, सनातन धर्म, राजनीति, गोसंरक्षण और युवाओं की भूमिका पर अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि रामराज्य का मूल भाव आपसी प्रेम, कर्तव्य पालन और आत्मनिर्भर भारत है। उनके अनुसार ऐसा भारत होना चाहिए जो आर्थिक रूप से मजबूत, समृद्ध और विश्व का मार्गदर्शन करने वाला बने।संतों की राजनीति में बढ़ती सक्रियता पर उन्होंने कहा कि संन्यासी का मूल धर्म साधना और समाज को दिशा देना है, राजनीति करना नहीं। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि योगी आदित्यनाथ एक अपवाद हैं और वर्तमान में राजर्षि की भूमिका निभा रहे हैं।क्रिकेटर विराट कोहली और अनुष्का शर्मा के संतों से मिलने के सवाल पर उन्होंने कहा कि यदि युवा संतों और आध्यात्मिक परंपराओं से जुड़ रहे हैं तो यह सकारात्मक संकेत है और इससे धर्म तथा संस्कृति के प्रति जागरूकता बढ़ती है।मंदिरों में वीआईपी दर्शन व्यवस्था पर रामभद्राचार्य ने स्पष्ट कहा कि वह इसका पूरी तरह विरोध करते हैं। उनके अनुसार भगवान के दरबार में सभी भक्त समान हैं और किसी प्रकार की वीआईपी संस्कृति नहीं होनी चाहिए।गोमाता को राष्ट्रमाता घोषित करने की मांग पर उन्होंने कहा कि गाय पहले से ही विश्वमाता है और देश में गोवध पर पूर्ण प्रतिबंध होना चाहिए। वहीं संयुक्त परिवार व्यवस्था को भारतीय संस्कृति की शक्ति बताते हुए उन्होंने इसे पुनर्जीवित करने की आवश्यकता पर जोर दिया।युवाओं के लिए संदेश देते हुए उन्होंने कहा कि चरित्र निर्माण, ब्रह्मचर्य, शिक्षा, व्यायाम और राष्ट्र सेवा जीवन के महत्वपूर्ण आधार हैं। साथ ही उन्होंने तकनीक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) को उपयोगी बताते हुए कहा कि वास्तविक ज्ञान गुरु, परंपरा और मूल ग्रंथों के अध्ययन से ही प्राप्त होता है।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यों की सराहना करते हुए उन्होंने विश्वास जताया कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य अवश्य पूरा होगा और भारत पुनः विश्व में अग्रणी भूमिका निभाएगा।