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पूर्व सपा एमएलसी कमलेश पाठक सहित  10 दोषियों को उम्रकैद

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पूर्व सपा एमएलसी कमलेश पाठक 


पारदर्शी विकास न्यूज़  औरैया। जिले के बहुचर्चित पंचमुखी मंदिर दोहरे हत्याकांड में करीब छह साल बाद अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। 19 अगस्त 2026 को औरैया न्यायालय ने पूर्व सपा एमएलसी कमलेश पाठक समेत 10 हत्याभियुक्तों को आजीवन सश्रम कारावास की सजा सुनाई। अदालत ने सभी दोषियों पर 50-50 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए फैसला सुनाए जाने के दौरान न्यायालय परिसर और आसपास के क्षेत्रों में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए।पुलिस के अनुसार घटना 15 मार्च 2020 की है। मोहल्ला नारायणपुर निवासी आशीष कुमार ने कोतवाली औरैया में तहरीर देकर बताया था कि उनके मोहल्ले में स्थित पंचमुखी मंदिर पर कब्जे को लेकर विवाद चल रहा था। इसी विवाद के दौरान उनके भाई और अधिवक्ता मंजुल चौबे तथा बहन सुधा की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। घटना के बाद पुलिस ने कोतवाली औरैया में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की।मामले में पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक अभिरक्षा में भेजा। विवेचना के दौरान पुलिस टीम ने घटनास्थल से जुड़े साक्ष्य जुटाए और गवाहों के बयान दर्ज किए। उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया गया। इसके बाद मामले की सुनवाई लगातार चली। पुलिस और अभियोजन पक्ष ने निर्धारित तारीखों पर गवाहों को अदालत के सामने पेश कराया और अन्य साक्ष्य भी प्रस्तुत किए।अदालत से सजा पाने वालों में पूर्व सपा एमएलसी कमलेश पाठक, रामू पाठक, संतोष पाठक, कुलदीप अवस्थी उर्फ पप्पू, विकल्प अवस्थी उर्फ चैनू अवस्थी, राजेश शुक्ला भगवताचार्य, अवनीश प्रताप सिंह, आशीष दुबे, शिवम अवस्थी और रविन्द्र उर्फ लला चौबे शामिल हैं। सभी को आजीवन सश्रम कारावास के साथ 50-50 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई गई।पुलिस ने बताया कि यह कार्रवाई उत्तर प्रदेश पुलिस के ऑपरेशन कनविक्शन अभियान के तहत प्रभावी विवेचना और अभियोजन पैरवी का परिणाम है। मामले की मॉनीटरिंग लगातार की गई। थाना कोतवाली औरैया पुलिस टीम, पैरोकार हेड कांस्टेबल विनय कुमार, मॉनीटरिंग टीम और अभियोजन अधिकारी चन्द्रभूषण तिवारी की भूमिका भी महत्वपूर्ण रही।पुलिस प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार पूर्व सपा एमएलसी कमलेश पाठक के खिलाफ पहले से 41 अभियोग पंजीकृत हैं। अदालत के फैसले के बाद करीब छह साल पुराने इस दोहरे हत्याकांड का मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है। पुलिस और अभियोजन पक्ष ने फैसले को गंभीर अपराधों में प्रभावी पैरवी की महत्वपूर्ण सफलता बताया है।