
डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन पर उठे सवाल
अभिनव शुक्ला ‘गोलू’ बने नगर निगम कार्यकारिणी के उपसभापति
पारदर्शी विकास न्यूज़ कानपुर। नगर निगम कार्यकारिणी की बैठक में शहर की सफाई व्यवस्था और डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन को लेकर बड़े फैसले लिए गए, लेकिन जमीनी हकीकत पर सवाल अब भी खड़े हैं। बुधवार को महापौर प्रमिला पांडेय की अध्यक्षता में हुई बैठक में अधिकारियों को सफाई व्यवस्था दुरुस्त करने और टेंडर प्रक्रिया में पारदर्शिता बरतने के निर्देश दिए गए। बैठक में बिना कार्यकारिणी की जानकारी के सफाई व्यवस्था से जुड़े टेंडर जारी किए जाने पर महापौर ने नाराजगी जताई और निर्देश दिए कि सभी प्रस्ताव पहले कार्यकारिणी के सामने रखे जाएं। वहीं प्रत्येक वार्ड में क्रियाघर बनवाने और पुराने क्रियाघरों की मरम्मत कराने का निर्णय भी लिया गया। लेकिन शहर के कई वार्डों में डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन व्यवस्था की स्थिति अलग नजर आ रही है। लोगों का कहना है कि नगर निगम की बैठकें और दावे तो होते हैं, लेकिन इसका असर कई क्षेत्रों में दिखाई नहीं देता। वार्ड 88 के लोगों ने बताया कि कूड़ा उठाने वाली गाड़ी नियमित नहीं आती। कई बार एक-दो दिन नहीं बल्कि पूरे सप्ताह तक वाहन के दर्शन नहीं होते, जिससे लोगों को मजबूरी में कूड़ा इधर-उधर फेंकना पड़ता है। वहीं वार्ड 70 के लोगों का कहना है कि उनके क्षेत्र में कूड़ा कलेक्शन वाहन नियमित रूप से पहुंच रहा है।ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या नगर निगम की बैठकें केवल फाइलों तक सीमित रह जाती हैं या फिर फैसलों का असर धरातल पर भी दिखाई देगा। शहरवासियों का कहना है कि सफाई व्यवस्था सुधारने के लिए केवल बैठक और आदेश नहीं, बल्कि नियमित निगरानी और जवाबदेही तय करना जरूरी है।नगर निगम की ओर से सफाई व्यवस्था को बेहतर बनाने के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन अलग-अलग वार्डों की स्थिति इन दावों की वास्तविकता पर सवाल खड़े कर रही है।