
पारदर्शी विकास न्यूज़ वृन्दावन। कालीदह क्षेत्र स्थित अखण्ड दया धाम में मंगलायतन सेवा ट्रस्ट द्वारा आयोजित सप्त दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा सप्ताह ज्ञान यज्ञ महोत्सव के तीसरे दिन महामंडलेश्वर आचार्य स्वामी भास्करानंद महाराज ने भक्तों को भक्ति का महत्व बताया। उन्होंने भगवान के 24 अवतारों, सागर मंथन, धन्वंतरि व मोहिनी अवतार, प्रह्लाद प्रसंग, ध्रुव चरित्र, विदुर प्रसंग, सती चरित्र और नरसिंह अवतार की कथा सुनाई।स्वामी भास्करानंद महाराज ने कहा कि मन, वाणी और कर्म से स्वयं को परमात्मा को सौंप देना तथा निस्वार्थ भाव से प्रभु का नाम स्मरण करना ही सच्ची भक्ति है। उन्होंने भक्ति के नौ स्वरूप श्रवण, कीर्तन, स्मरण, पादसेवन, अर्चन, वंदन, दास्य, सख्य और आत्मनिवेदन बताए। उन्होंने कहा कि इनमें से किसी एक भक्ति मार्ग को भी दृढ़ विश्वास और निस्वार्थ भाव से अपनाने पर मनुष्य प्रभु की अनुभूति प्राप्त कर सकता है।इस अवसर पर मुख्य यजमान खंडेलवाल परिवार ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच व्यासपीठ का पूजन किया। श्रीमद्भागवत महापुराण की आरती भी हुई। कार्यक्रम में साध्वी कृष्णानंद महाराज, सतीश खंडेलवाल, कल्पना खंडेलवाल, डॉ. गोपाल चतुर्वेदी और डॉ. राधाकांत शर्मा सहित अनेक गणमान्य लोग मौजूद रहे।