
Pardarshi Vikas News Lucknow
संविधान निर्माता बोधिसत्व बाबा साहब डॉ अम्बेडकर की 135वीं जयंती पर बसपा सुप्रीमो मायावती ने उन्हें शत शत नमन और कोटि-कोटि श्रद्धासुमन अर्पित किए हैं। बसपा सुप्रीमो ने एक्स पर दिए गए बयान में देश के सभी राजनीतिक दलों को निशाने पर लिया और और कहा है कि अति मानवतावादी,सर्वजन हितैषी और बहुजन कल्याणकारी संविधान के उद्देश्यों को प्राप्त करने में सफल नहीं हुए हैं। बसपा सुप्रीमो ने चुनावी सफलता के लिए समर्थकों का आह्वान किया है और कहा है कि सामाजिक परिवर्तन और आर्थिक मुक्ति के कारवां को सफल करने के लिए राजनीतिक सत्ता जरूरी है।
बसपा सुप्रीमो ने सुबह पार्टी कार्यालय पर बाबा साहब डॉ अम्बेडकर के चित्र पर पुष्प अर्पित कर भावभीनी श्रद्धांजलि दी और उनके मिशन और मूवमेंट को आगे बढ़ाने का संकल्प दोहराया।
अध्यक्ष, उत्तर प्रदेश की चार बार रहीं मुख्यमंत्री व पूर्व सांसद बहन कु. मायावती जी ने, देश में शोषित व पिछड़े 'बहुजन समाज' के मसीहा परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर को उनकी जयंती पर, आज सुबह यहाँ पार्टी के वरिष्ठ लोगों व कार्यकर्ताओं के साथ शत्-शत् नमन् एवं अपार श्रद्धा सुमन अर्पित करने के बाद अपने संदेश में कहा कि देश की सत्ता में मुख्यतः सामंती व जातिवादी सोच तथा अन्याय एवं शोषणकारी तत्वों के लगातार हावी/प्रभावी रहने के कारण बाबा साहेब का अति-मानवतावादी, सर्वजन हितैषी व बहुजन-कल्याणकारी संविधान अपने पवित्र उद्देश्यों को प्राप्त करने में सही से सफल नहीं हो पा रहा है, जिसके निदान के लिये देश व राज्यों में भी बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर की 'सर्वजन हिताय व सर्वजन सुखाय' नीति व सिद्धान्त वाली उनकी अनुयाई पार्टी बी.एस.पी. की सरकार जरूरी है।
देश में ऐसा अनुपम संविधान होने के बावजूद भारत अभी तक स्वावलम्बी / आत्मनिर्भर व विकसित देश बनकर यहाँ के करोड़ों बहुजनों की अपार गरीबी, बेरोजगारी, जातिवादी द्वेष व जुल्म-ज्यादती से मुक्त तथा समता एवं न्याय-युक्त जीवन नहीं दे पाया है तो ऐसा क्यों? इसका जवाब ढूंढने पर देश में बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर का 'सामाजिक परिवर्तन व आर्थिक मुक्ति' का कारवाँ चुनावी सफलता हासिल करके अपनी मंजिल की ओर जरूर आगे बढ़ेगा।
बी.एस.पी. के रूप में 'बहुजन समाज' की राजनीतिक शक्ति की उदय का, जिसके संघर्ष के बल पर अन्ततः श्री वी.पी. सिंह की गठबंधन सरकार में बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर व श्री नेलसन मण्डेला को भारतरत्न मिला और साथ ही ओबीसी समाज को मण्डल आयोग की सिफारिश के अनुसार सरकारी नौकरी व शिक्षा के क्षेत्र में पहली बार 27 प्रतिशत आरक्षण मिला।
उत्तर प्रदेश के सभी 18 मण्डल के लोगों ने इस बार बी.एस.पी सरकार द्वारा यहाँ राजधानी लखनऊ में गोमती नदी के तट पर निर्मित विशाल एवं भव्य 'डा. भीमराव सामाजिक परिवर्तन स्थल' में परिवार के साथ पहुँचकर वहाँ गुम्बदाकार के बने 'डा. अम्बेडकर स्मारक' में अपने मसीहा को शत्-शत् नमन् और स्मरण किया, जो यह सिलसिला दिन भर जारी रहेगा। उल्लेखनीय है कि दिल्ली सीमा पर नोएडा में मा. बहनजी की सरकार द्वारा स्थापित 'राष्ट्रीय दलित प्रेरणा स्थल' पर मरम्मत का कार्य होने की वजह से इस बार पश्चिमी यूपी के लोग भी लखनऊ के 'डा. अम्बेडकर स्मारक' पर ही बाबा साहेब को अपने श्रद्धा सुमन अर्पित कर रहे हैं।
देश के बाकी सभी राज्यों में भी बी.एस.पी. के वरिष्ठ पदाधिकारियों की मौजूदगी में पार्टी के लोगों ने जोन स्तर पर कार्यक्रम आयोजित कर बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर को श्रद्धा सुमन अर्पित किया और बी.एस.पी. के आयरन लेडी मा. बहनजी के नेतृत्व में देश में बहुजन हितैषी 'सामाजिक परविर्तन व आर्थिक मुक्ति हेतु सत्ता की मास्टर चाबी प्राप्त करने हेतु पूरे तन, मन, धन से सहयोग जारी रखने के संकल्प को 'बाबा साहेब का मिशन अधूरा- बी.एस.पी. करेगी पूरा तथा 'मान्यवर श्री कांशीराम जी का मिशन अधूरा-मा. बहनजी करेंगी पूरा आदि नारों के साथ दोहराया, जिसके लिये मा. बहनजी ने सभी का तहेदिल से आभार व धन्यवाद प्रकट किया और यकीन दिलाया कि उनकी मेहनत यूपी की तरह जरूर रंग लायेगी।
पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने कहा कि संविधान निर्माता भारतरत्न परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर की जयंती बी.एस.पी. के लोग हर वर्ष पूरी मिशनरी भावना से मनाते हैं, किन्तु खासकर सरकार इस दिन को बाबा साहेब के अनुयाई 'बहुजन समाज की सुरक्षा, सम्मान व विकास आदि के ऑकलन भी करे तो यह सही होगा, तभी इन वर्गों के लोगों पर सरकार, सत्ताधारी पार्टी व सामंतों का जातिवादी शोषण, जुल्म-ज्यादती एवं द्वेष आदि का कुचक्र थोडा थम पायेगा, यही अम्बेडकर जयंती पर बहुजनों की चिन्ता व चिन्तन है।
जनता में हर दुख को सह लेने की शक्ति होने का यह मतलब नहीं है कि सरकारें उन्हें गरीबी, बेरोजगारी व पिछड़ेपन आदि की अंधी खाई से निकालने और उन्हें रोटी-रोजी व न्याय-युक्त आत्म-सम्मान का जीवन देकर ऊपर उठाने /आगे बढ़ाने की अपनी संवैधानिक व कानूनी उत्तरदायित्वों को सही से ना निभायें, हालाँकि यह जरूरी कार्य अम्बेडकरवादी पार्टी बी.एस.पी के राज में ही ज्यादातर संभव है।