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मां संकठा के नाम से प्रसिद्ध है काशी का संकठा घाट

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पारदर्शी विकास न्यूज़ वाराणसी। काशी के प्राचीन और धार्मिक महत्व वाले घाटों में संकठा घाट की विशिष्ट पहचान है। मां संकठा को समर्पित यह घाट आस्था, पौराणिक मान्यताओं और ऐतिहासिक विरासत का प्रतीक है। राजेश शुक्ला के अनुसार, मां संकठा के मंदिर के कारण कालांतर में घाट का नाम उन्हीं के नाम पर पड़ा। घाट के ऊपर स्थित सिद्धेश्वरी गली में मां संकठा, मां पीतांबरा, मां कात्यायनी, मां विंध्यवासिनी और मां सिद्धेश्वरी दुर्गा के प्रसिद्ध मंदिर हैं। इसी क्षेत्र में आत्मविश्वेश्वर महादेव का मंदिर भी श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है।बताया जाता है कि शक्ति उपासक विश्वम्भर दयाल की पत्नी ने वर्ष 1825 में घाट का निर्माण कराया था। काशीखंड की मान्यताओं के अनुसार, प्राचीन समय में यह क्षेत्र श्मशान घाट था। यहां यमेश्वर शिव और हरिश्चन्द्रेश्वर मंदिर भी स्थित हैं। घाट पर चिंतामणि विनायक, बैकुंठ माधव और वशिष्ठेश्वर शिव के मंदिर भी हैं।चैत्र और शारदीय नवरात्र में यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन-पूजन के लिए पहुंचते हैं। गंगा दशहरा, दीपावली और यम द्वितीया पर भी घाट का विशेष धार्मिक महत्व रहता है। राजेश शुक्ला ने कहा कि इस पौराणिक घाट पर गंगा सेवा करने का अवसर मिलना उनके लिए गर्व की बात है।