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जनस्वास्थ्य अभियान  उठाएगा राईट टू हेल्थ की  जिम्मेदारी

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हर परिवार में बढ़ रहा दवाओं का खर्च, स्वास्थ्य के बजट में अपेक्षित वृद्धि नहीं
स्वास्थ्य बजट पर गंभीर मंथन


संजीव भारती
पारदर्शी विकास न्यूज़  लखनऊ।
जन स्वास्थ्य अभियान के 25 वर्ष  पूरे होने पर शुक्रवार को ए आई पी एस एन,बी जी वी एस एवं अन्य जनसंगठनों की ओर से जन स्वास्थ्य अभियान -एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला में अलमाटा के 2000 के जनस्वास्थ्य घोषणा पत्र के बाद देश में स्वास्थ्य और चिकित्सा सेवाओं की स्थिति पर विस्तार से संवाद हुआ।ए आई पी एस एन की ओर से जनस्वास्थ्य अभियान डेस्क की ओर से संदर्भ व्यक्ति इन्द्रनील ने भारत में स्वास्थ्य एवं चिकित्सा सेवाओं की मौजूदा तस्वीर प्रस्तुत  की और कहा कि पिछले दो दशकों में हर परिवार में दवाओं पर खर्च बढ़ रहा है, परंतु देश के स्वास्थ्य बजट में कटौती हो रही है। स्वास्थ्य एवं चिकित्सा सेवाओं  के मामले में प्राइवेट सेक्टर मजबूत हो रहा है और सरकारी सेक्टर कमजोर हो रहा है।आम आदमी के ऊपर इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा हैदवाओं के दाम बेतहाशा बढ़ने पर लाखों लोग इलाज के अभाव में मौत के शिकार हो रहे हैं।जन स्वास्थ्य अभियान -2के अन्तर्गत -स्वास्थ्य हमारा अधिकार है, कारोबार नहीं -जनता के लिए स्वास्थ्य का अधिकार -राइट टू हेल्थ -की थीम पर काम के लिए आम जनता के बीच से सर्वेक्षण और संवाद के माध्यम से बेहतर स्वास्थ्य व्यवस्था की मांग पैदा की जाएगी और समुदाय और नागरिक समाज की ओर से आवाज उठाई जाएगी।हम जनता के माध्यम से पीपुल्स हेल्थ चार्टर तैयार करेंगे।इन्द्रनील ने जनसुनवाई और सर्वेक्षण के तरीके बताए और गूगल फार्म के बारे में जानकारी दी।उत्तर प्रदेश में बी जी वी एस की ओर से जन स्वास्थ्य अभियान का काम देख रहे तेजराम ने कहा कि स्वास्थ्य  एक मूलभूत अधिकार और सार्वजनिक सुविधा है जिसे सभी लोगों तक सुलभ और गुणवत्तापूर्ण रुप से पहुंचाना सरकार की जिम्मेदारी है। पिछले तीन -चार दशकों में स्वास्थ्य सेवाओं का निजीकरण बढ़ा है और सार्वजनिक स्वास्थ्य पर सरकारी खर्च कम हुआ है।कार्यशाला का संचालन यू पी एम एस आर और जन स्वास्थ्य अभियान के स्टेट कन्वीनर  अभिजीत तालुकदार ने किया।अखिल भारतीय जन विज्ञान नेटवर्क की जनरल सेक्रेटरी आशा ने -भविष्य का भारत जो आज है इससे बेहतर चाहिए - विषय पर विस्तार से विचार रखे और कहा कि आज के भारत में शिक्षा और स्वास्थ्य जनता के अधिकार की जरूरत व्यापार बन‌ गया है। दुनिया को भारत के चौथी अर्थव्यवस्था बनने की झूठी तस्वीर दिखाई जा रही है। सत्ता प्रायोजित अंधविश्वास और साम्प्रदायिकता से देश की साझी विरासत और सेकुलर छवि को नुक्सान पहुंचाया जा रहा है।कार्यशाला में उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों से विभिन्न संगठनों के 50 प्रतिनिधि शामिल हुए जिसमें 15महिलाएं आई थीं। रायबरेली, कुशीनगर और बाराबंकी से प्रतिनिधियों की संख्या सबसे अधिक रही।बस्ती, अयोध्या नगर, आजमगढ़, कुशीनगर, लखनऊ, अयोध्या से विभिन्न संस्थाओं के डेलीगेट आए हुए थे।एड्वा की महिलाएं सबसे अधिक संख्या में रहीं।बी जी वी एस के पूर्व स्टेट कमेटी मेम्बर संजीव,राम भजन गुप्ता,नंद लाल गुप्ता,राजदेव प्रसाद, फूलचंद्र बौद्ध, शिशुपाल, सुग्रीव भारती, बसंत लाल, सारिका, गीता वर्मा , मंजेश कुमारी, आलोक बौद्ध,राजदेव चतुर्वेदी, राकेश कुमार,शिव बरन, विजय पाल,विनय कुमार अवस्थी,राम केश शर्मा, रामायण यादव, विशाल शर्मा , सुशीला,मीरा , कंचन, अफसाना, अमित मिश्रा, रानी,अक्षय प्रताप सिंह ,विशाल शर्मा आदि मौजूद रहे।

 



2026-27 में  उत्तर प्रदेश का कुल अनुमानित बजट -9.13लाख करोड़
स्वास्थ्य का आवंटित बजट -5181.4करोड
कुल बजट का 5.68प्रतिशत

राज्य सरकार से मांग -, एक नजर
1-स्वास्थ्य बजट को जनता की वास्तविक जरूरतों के अनुरूप बढ़ाया जाए
2-सार्वजनिक स्वास्थ्य और प्राथमिक चिकित्सा के लिए बजट का दायरा विस्तृत किया जाय
3-स्वास्थ्य  बजट के खर्च की नियमित निगरानी के लिए सोशल आडिट सुनिश्चित हो
4-डाक्टरों,सी एच ओ, एएनएम और लैब टेक्नीशियनों के रिक्त पदों को तुरंत भरा जाय
5-लखनऊ के केजीएमयू तर्ज पर प्रदेश के जिला अस्पतालों में एलजीबीटी क्लीनिक स्थापित किए जाएं
6-आयुष्मान् आरोग्य मंदिरों में बिजली, पानी, शौचालय, इंटरनेट और लैब जैसी मूलभूत सुविधाएं बहाल हों।