
पारदर्शी विकास न्यूज़ सुलतानपुर। हिंदी दिवस की पूर्व संध्या पर विश्व हिंदी परिषद के तत्वावधान में जिला पंचायत सभागार में संगोष्ठी आयोजित की गई। जिलाध्यक्ष देवेंद्र कुमार पाठक की अध्यक्षता में हुई संगोष्ठी में साहित्यकारों, पत्रकारों और बुद्धिजीवियों ने ‘हिंदी भाषा-दशा और दिशा’ विषय पर विचार रखे।मुख्य अतिथि एवं परिषद के आजीवन सदस्य डॉ. राधेश्याम सिंह ने कहा कि हिंदी को स्वतंत्रता संग्राम के समय मिले गौरवपूर्ण स्थान को फिर मजबूत करने की जरूरत है। हिंदी का उत्थान तभी संभव है, जब वह आधुनिक ज्ञान-विज्ञान और तकनीक की भाषा बने। उन्होंने कहा कि सभी भाषाएं समान रूप से अभिव्यक्ति का माध्यम हैं और किसी भाषा को छोटा-बड़ा नहीं माना जाना चाहिए।परिषद के पूर्वांचल प्रदेश अध्यक्ष संतराम शुक्ल ने साहित्यकारों और शोधकर्ताओं को उनकी रचनाओं व शोध कार्यों में सहयोग का आश्वासन दिया। प्रदेश महासचिव राजेंद्र मिश्र ने हिंदी के प्रचार-प्रसार को जनांदोलन बनाने का आह्वान किया।जिलाध्यक्ष देवेंद्र कुमार पाठक ने कहा कि परिषद हर माह हिंदी प्रेमियों और साहित्यकारों को प्रतिभा प्रदर्शन का अवसर देगी। विद्यार्थियों को कविता, कहानी और निबंध लेखन के लिए प्रोत्साहित कर प्रमाण पत्र भी दिए जाएंगे। कार्यक्रम में सारिका सिंह, अभिषेक पांडेय और अनुपमा मिश्रा ने काव्य पाठ किया। संचालन सारिका सिंह ने किया