
ममता ने कहा-चुनाव आयोग विलेन, मैं आजाद पंछी, शेर की तरह लड़ूंगी
कोलकाता। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मंगलवार को कोलकाता में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा- मैं सीएम पद से इस्तीफा नहीं दूंगी। हम जनादेश से नहीं, साजिश से हारे हैं। इसलिए इस्तीफा देने राजभवन नहीं जाऊंगी।
ममता ने आगे कहा- चुनाव आयोग असली विलेन है। उसने भाजपा के साथ मिलकर 100 सीटें लूटीं। अब मेरे पास कोई कुर्सी नहीं है, मैं आजाद पंछी हूं। कहीं से भी चुनाव लड़ सकती हूं, सड़कों पर रहूंगी। ममता ने आरोप लगाया- भाजपा ने काउंटिंग सेंटरों पर कब्जा कर लिया था। मेरे साथ बदसलूकी की। उम्मीदवारों और कार्यकर्ताओं के साथ अत्याचार किया। पार्टी और इंडिया गठबंधन के नेता मेरे साथ हैं। हम फिर से उभरेंगे और शेर की तरह लड़ेंगे।
पश्चिम बंगाल सहित 5 राज्यों के विधानसभा चुनाव के नतीजे सोमवार को आ चुके हैं। बंगाल में भाजपा ने 293 में से 207 सीटें जीत ली हैं। पार्टी 9 मई को राज्य में पहली बार सरकार बनाने जा रही है। टीएमसी सिर्फ 80 सीटें जीत सकी। 15 साल बाद ममता के हाथ से सत्ता चली गई है।
ममता ने कहा कि मैं इस्तीफा नहीं दूंगी, मैं हारी नहीं हूं। मेरे इस्तीफा देने का सवाल ही नहीं उठता। इसलिए राजभवन नहीं जाऊंगी। वे ऑफिशियली हमें हरा सकते हैं, लेकिन नैतिक रूप से हम चुनाव जीते हैं। चुनाव से दो दिन पहले हमारे लोगों को गिरफ्तार किया गया। जगह-जगह छापे मारे गए। आईपीएस-आईएएस अधिकारियों का तबादला किया गया। प्रधानमंत्री और गृह मंत्री इसमें सीधे तौर पर शामिल हैं। उन्होंने कहा कि मैंने राजीव गांधी, मनमोहन सिंह, वाजपेयी सहित कई सरकारें देखीं, लेकिन ऐसा अत्याचार कभी नहीं देखा। अत्याचार की कोई सीमा नहीं रही। यहां लोगों को प्रताड़ित किया गया।
ममता ने कहा कि पहले राउंड की काउंटिंग के बाद ही वे कहने लगे कि भाजपा 195-200 सीटें जीत रही है। अंतिम नतीजे का इंतजार नहीं किया। भाजपा वालों ने पोलिंग स्टेशन के अंदर घुसकर लोगों और काउंटिंग एजेंट्स को पीटना शुरू कर दिया। हम चुनाव आयोग के खिलाफ कदम उठाएंगे। क्या करेंगे, यह अभी नहीं बताएंगे। दूसरी बात, हमने फैसला किया है कि 5 सांसदों समेत 10 लोगों की एक फैक्ट-फाइंडिंग कमेटी बनाई जाएगी।
ममता बनर्जी ने आगे कहा कि इस लड़ाई में उनके साथ इंडिया अलायंस के भी साथी हैं। उन्होंने कहा, "सोनिया, राहुल गांधी, अरविंद केजरीवाल, उद्धव ठाकरे, अखिलेश यादव, तेजस्वी यादव, हेमंत सोरेन ने मुझे फोन किया। इंडिया गठबंधन के सभी सहयोगियों ने मुझसे कहा कि वे पूरी तरह से और बिल्कुल मेरे साथ हैं। मुझे लगता है कि आने वाले दिनों में हमारी एकजुटता और मज़बूत होगी।" ममता बनर्जी ने आगे कहा, “अखिलेश यादव ने मुझसे पूछा कि क्या वह आज ही आ सकते हैं, लेकिन मैंने उनसे कल आने को कहा है। तो, वह कल आएंगे। एक-एक करके सब आएंगे।”
तृणमूल नेता ने कहा, “मेरा लक्ष्य बहुत साफ है। मैं इंडिया टीम को मज़बूत करूंगी, ठीक एक आम इंसान की तरह। अब मेरे पास कोई कुर्सी नहीं है, इसलिए मैं एक आम नागरिक हूं। तो, आप मुझसे यह नहीं कह सकते कि मैं आपकी कुर्सी का इस्तेमाल कर रही हूं। अब मैं एक आजाद पंछी हूं। मैंने अपनी पूरी जिंदगी लोगों की सेवा में लगा दी, इन 15 सालों में भी मैंने पेंशन का एक पैसा भी नहीं निकाला है। मैं सैलरी का भी एक पैसा नहीं ले रही हूं। लेकिन अब, मैं एक आजाद पंछी हूं। इसलिए, मुझे कुछ काम करना है, और मैं उसे कर लूंगी।”
बता दें कि देश के इतिहास में यह पहला मौका है, जब कोई मुख्यमंत्री विधानसभा चुनावों में हार के बाद अपने पद से इस्तीफा देने से ही इनकार कर रहा है। चुनाव नतीजों के बाद कोलकाता में एक प्रेस कॉन्फ्रेन्स में कहा कि उनकी पार्टी चुनाव हारी नहीं है बल्कि हराई गई है। उन्होंने कहा, हम हारे नहीं बल्कि हमें हराया गया है। उन्होंने ये भी कहा कि ये लड़ाई भाजपा से नहीं थी बल्कि चुनाव आयोग से थी।
इनसेट बॉक्स
गवर्नर के पास क्या हैं विकल्प?
नयी दिल्ली। पश्चिम बंगाल की निवर्तमान मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा न देने के ऐलान से सियासी खलबली मच गई है। बंगाल से कोलकाता तक इस बात के चर्चे हैं कि अगर चुनाव हारकर भी कोई मुख्यमंत्री अपने पद से इस्तीफा नहीं देता है तो आगे क्या हो सकता है और संविधान में ऐसे हालात से निपटने के लिए गवर्नर को कौन सी शक्तियां दी गई हैं? दरअसल, भारत के इतिहास में यह पहला मौका है, जब कोई मुख्यमंत्री हार के बाद भी इस्तीफा देने से इनकार कर रहा है। ऐसे में अगर ममता बनर्जी मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा नहीं देती हैं तो राज्य के राज्यपाल के पास उन्हें बर्खास्त करने का संवैधानिक अधिकार है। संविधान के अनुच्छेद 164 तहत मुख्यमंत्री की नियुक्ति राज्यपाल करते हैं और यही अनुच्छेद उन्हें बहुमत खोने की स्थिति में मुख्यमंत्री को बर्खास्त करने का अधिकार देता है। हालांकि, इस शक्ति का इस्तेमाल करने से पहले गवर्नर ममता से इस्तीफा मांग सकते हैं और इनकार करने पर तुरंत विधानसभा भंग कर सकते हैं। वैसे भी मौजूदा विधानसभा का कार्यकाल 7 मई को समाप्त हो रहा है। ऐसी स्थिति में राज्यपाल किसी भी संवैधानिक संकट या कानून-व्यवस्था से संबंधित संकट से बचने के लिए राज्य में अनुच्छेद 356 के तहत राष्ट्रपति शासन लगाने की भी सिफारिश कर सकते हैं।