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इलाज की आस में भटकती रही मासूम, चार दिन बाद मौत

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पारदर्शी विकास न्यूज़ कानपुर। हमीरपुर की चार दिन की नवजात बच्ची की इलाज के अभाव में मौत हो गई। परिजनों का आरोप है कि बच्ची को गंभीर जन्मजात बीमारी होने के बावजूद तीन दिनों तक हमीरपुर, कानपुर और लखनऊ के कई सरकारी अस्पतालों के चक्कर लगाने पड़े, लेकिन कहीं भी समुचित इलाज नहीं मिला।परिजनों के अनुसार बच्ची का जन्म 28 मई को हमीरपुर के एक निजी अस्पताल में हुआ था। जन्म के बाद पता चला कि उसकी सांस और आहार नली आपस में जुड़ी हुई हैं। हालत गंभीर होने पर उसे बेहतर इलाज के लिए कानपुर के हैलट अस्पताल रेफर किया गया। यहां से बच्ची को लखनऊ भेज दिया गया।पिता मनोज और दादा इंद्रबाबू का आरोप है कि लखनऊ के विभिन्न अस्पतालों में भी बच्ची को भर्ती नहीं किया गया। कभी वेंटिलेटर उपलब्ध न होने की बात कही गई तो कहीं इलाज की व्यवस्था न होने का हवाला दिया गया। लगातार अस्पतालों के चक्कर लगाने के बाद परिवार आर्थिक और मानसिक रूप से टूट गया।परिजनों का कहना है कि इलाज की उम्मीद में उन्होंने अपनी जमा-पूंजी खर्च कर दी, लेकिन बच्ची को राहत नहीं मिली। आखिरकार परिवार उसे लेकर वापस हमीरपुर लौट रहा था। इसी दौरान उसकी हालत बिगड़ती गई और रविवार देर रात उसने दम तोड़ दिया।बेटी की मौत से दुखी पिता मनोज ने कहा कि उनकी बच्ची को समय पर इलाज मिल जाता तो शायद उसकी जान बच सकती थी। वहीं दादा इंद्रबाबू ने कहा कि परिवार ने हर संभव कोशिश की, लेकिन अस्पतालों में केवल रेफर किया जाता रहा।मासूम की मौत के बाद परिवार ने स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि गंभीर बीमारी से जूझ रहे नवजातों के लिए समय पर इलाज और विशेषज्ञ सुविधाएं उपलब्ध कराना जरूरी है, ताकि किसी अन्य परिवार को ऐसी त्रासदी का सामना न करना पड़े।