
पारदर्शी विकास न्यूज़ लखनऊ। बहुजन समाज पार्टी ने केंद्र और सभी राज्यों की सरकारों से मुनाफाखोरी /लाभ कमाने वाली व्यापारिक सोच/प्रवृत्ति को त्यागकर संविधान की सही मानवतावादी, कल्याणकारी नीति और सिद्धांत पर अमल करने की मांग की है। बसपा सुप्रीमो ने कहा है कि केंद्र सरकार को देश के ज्वलंत मुद्दों और गंभीर समस्याओं के निदान को कारगर कदम उठाना चाहिए,साथ ही हर हाथ को काम और हर पढ़ें लिखे बेरोजगार युवा को सरकारी नौकरियां देने की मांग की है।मायावती ने सोशल मीडिया पर जारी अपने बयान में कहा कि बसपा सरकार के दौरान उत्तर प्रदेश में पुलिस और पंचायती राज विभाग में लगभग सात लाख नए सरकारी पद सृजित किए गए थे। साथ ही सरकारी नौकरियों की भर्ती पर लगी रोक हटाकर सर्वसमाज के कई लाख लोगों को सरकारी सेवाओं में बहाली का अवसर दिया गया था।उन्होंने कहा कि इसके बाद लंबे समय से देश, विशेषकर उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पंजाब समेत कई राज्यों में महंगाई, अति-गरीबी, बेरोजगारी, अशिक्षा, बदतर स्वास्थ्य व्यवस्था, पिछड़ापन, पलायन, महिला असुरक्षा, पेपर लीक और भ्रष्टाचार जैसी गंभीर समस्याएं बनी हुई हैं। मायावती ने आरोप लगाया कि सरकारें इन ज्वलंत मुद्दों के समाधान के प्रति उदासीन और लापरवाह बनी हुई हैं।मायावती ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर बेरोजगारी और अंधकारमय भविष्य जैसे मुद्दों को लेकर शिक्षित युवाओं के 36 दिनों तक चले आंदोलन का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इस आंदोलन ने इन समस्याओं को राष्ट्रीय स्तर पर गंभीर चर्चा का विषय बनाया है।उन्होंने केंद्र और राज्य सरकारों से देश के करोड़ों गरीबों, श्रमिकों, युवाओं, महिलाओं तथा बेरोजगारी से प्रभावित परिवारों की वास्तविक चिंताओं को प्राथमिकता देने की अपील की।बसपा प्रमुख ने सरकारी नौकरियों पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता बताते हुए कहा कि सरकारी विभागों में रिक्त पड़े लाखों पदों पर पारदर्शी, भ्रष्टाचार-मुक्त और समयबद्ध भर्ती तत्काल शुरू की जानी चाहिए। साथ ही उन्होंने राष्ट्रीय संपत्तियों को निजी हाथों में बेचने की प्रक्रिया रोकने की मांग भी की।मायावती ने कहा कि यदि प्रत्येक परिवार के कम से कम एक सदस्य को सरकारी नौकरी मिलती है तो इससे लाखों परिवारों को सीधा लाभ होगा। उनके मुताबिक इससे एससी, एसटी और ओबीसी समाज को भी सुरक्षा मिलेगी, जिनके लिए आरक्षण का प्रभावी क्रियान्वयन जरूरी है।मायावती ने सभी सरकारों से लाभ कमाने वाली व्यापारिक सोच को छोड़कर संविधान की मानवतावादी और कल्याणकारी नीतियों को ईमानदारी एवं निष्ठा के साथ लागू करने की अपील की। उन्होंने कहा कि ऐसी नीतियां देश के आम लोगों को रोजगार और सम्मानजनक जीवन देने में मददगार होंगी।उन्होंने संसद के मौजूदा सत्र में जंतर-मंतर पर आंदोलित छात्रों और बेरोजगार युवाओं के मुद्दों पर जारी गतिरोध समाप्त करने की भी मांग की। मायावती ने कहा कि सरकार को इन विषयों पर उचित बहस और चर्चा के बाद संबंधित विधेयकों को पारित कर कानून बनाने की प्रक्रिया आगे बढ़ानी चाहिए।