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गोविंद नगर पार्क विवाद पहुंचा शासन और प्रधानमंत्री कार्यालय तक

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PARDARSHI VIKASH NEWS कानपुर। गोविंद नगर के ब्लॉक-8 स्थित सार्वजनिक पार्क को लेकर विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि पार्क की मूल स्थिति को बदलते हुए हरियाली खत्म कर दी गई और सरकारी धन से इंटरलॉकिंग कराकर विवादित निर्माण को मजबूती देने का प्रयास किया गया।स्थानीय लोगों के अनुसार, पार्क में पहले करीब 10×10 फुट के छोटे चबूतरे पर मूर्तियां स्थापित थीं। धीरे-धीरे निर्माण का विस्तार किया गया। चबूतरे का आकार बढ़ाने के बाद चारों ओर दीवार बनाई गई और आरसीसी स्लैब डाल दी गई। विरोध के बाद कुछ समय के लिए काम रुका, लेकिन बाद में दोबारा निर्माण शुरू हुआ और वहां कथित बालाजी मंदिर स्थापित कर दिया गया।नागरिकों का आरोप है कि पार्क के करीब 80 प्रतिशत हिस्से से पेड़-पौधे, घास और हरियाली हटाकर इंटरलॉकिंग बिछा दी गई। उनका कहना है कि घनी आबादी वाले इस क्षेत्र में बच्चों के खेलने और बुजुर्गों के टहलने के लिए यही एकमात्र सार्वजनिक पार्क है।मामले में दायर जनहित याचिका संख्या 1023/2026 पर सुनवाई करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 22 अप्रैल 2026 को कहा था कि पार्क, खेल मैदान और खुले स्थानों पर अतिक्रमण स्वीकार नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने संबंधित अधिकारियों को ऐसे अतिक्रमण हटाकर पार्क को मूल स्वरूप में बहाल करने की जिम्मेदारी बताई थी।याचिकाकर्ता का आरोप है कि हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद विवादित निर्माण पर विद्युत कनेक्शन जारी कर दिया गया। इसके अलावा नगर निगम रिकॉर्ड में पार्क का नाम "ब्लॉक-8 पार्क" दर्ज होने और कार्यकारिणी द्वारा इसे समाजसेविका रामदेवी आर्य पार्क नाम दिए जाने के बावजूद वहां "बालाजी पार्क" नाम का नया शिलापट्ट लगा दिया गया।याचिकाकर्ता ने सवाल उठाया है कि बिना नगर निगम के निर्णय के पार्क का नाम बदलकर नया शिलापट्ट किसके आदेश पर लगाया गया। उन्होंने पूरे मामले की जांच की मांग की है।अब यह मामला स्थानीय स्तर से बढ़कर शासन और प्रधानमंत्री कार्यालय तक पहुंच गया है। भाजपा नेता प्रकाश वीर आर्य की शिकायत पर प्रधानमंत्री कार्यालय ने प्रकरण को उत्तर प्रदेश शासन को अग्रिम कार्रवाई के लिए भेजा है। वहीं नगर विकास मंत्री को भेजे गए पत्र पर भी आवश्यक कार्रवाई के लिए संबंधित विभाग को निर्देश दिए गए हैं।इधर शनिवार को नगर निगम का प्रवर्तन दस्ता पार्क पहुंचा। स्थानीय लोगों का आरोप है कि टीम ने विवादित निर्माण हटाने के बजाय वहां चल रहे निर्माण कार्य को पूरा करने की सलाह दी और दूसरे हिस्से में बने छोटे मंदिर के पास अतिक्रमण हटाने की चेतावनी दी।क्षेत्रीय नागरिकों ने मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए, पार्क को उसके पुराने स्वरूप में बहाल किया जाए और हाईकोर्ट के आदेश का पालन सुनिश्चित कराया जाए। साथ ही दोषी अधिकारियों और संबंधित लोगों पर कार्रवाई की मांग की गई है।