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"गंगा में कचरा नहीं, संस्कार छोड़िए" : राजेश शुक्ला

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पारदर्शी विकास न्यूज़ वाराणसी। गंगा घाटों की स्वच्छता को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता राजेश शुक्ला ने लोगों से जागरूकता की अपील करते हुए कहा कि गंगा केवल आस्था का प्रतीक नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों के जीवन, स्वास्थ्य और भारतीय संस्कृति की आधारशिला है। उन्होंने कहा कि घाटों पर फैला कचरा और प्लास्टिक अंततः गंगा में पहुंचकर जल को प्रदूषित करता है, जिससे जलीय जीवों और पर्यावरण पर गंभीर दुष्प्रभाव पड़ता है।उन्होंने बताया कि सिंगल-यूज प्लास्टिक और अन्य अपशिष्ट नदी के प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र को नुकसान पहुंचाते हैं। इससे मछलियों, डॉल्फिन और कछुओं जैसे जलीय जीवों का अस्तित्व भी खतरे में पड़ जाता है। साथ ही दूषित जल के कारण हैजा, डायरिया जैसी जलजनित बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।राजेश शुक्ला ने कहा कि गंगा भारतीय संस्कृति और सनातन आस्था का केंद्र है। लाखों श्रद्धालु धार्मिक अनुष्ठानों और मोक्ष की कामना लेकर गंगा तट पर आते हैं। ऐसे में घाटों की स्वच्छता बनाए रखना हमारी सांस्कृतिक जिम्मेदारी भी है। उन्होंने कहा कि स्वच्छ गंगा से पर्यटन, मत्स्य पालन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलती है।उन्होंने सभी नागरिकों से अपील की कि गंगा तट पर कूड़ा-कचरा न फैलाएं और दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करें। उनका संदेश था— "गंगा में कचरा नहीं, संस्कार छोड़िए", क्योंकि मां गंगा की स्वच्छता हम सभी की साझा जिम्मेदारी है।